पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या के लिए दोषी ठहराई जा चुकी और उम्रकैद की सजा काट रही नलिनी ने कल रात जेल में खुदकुशी करने की कोशिश की। वह अभी वेल्लोर जेल में बंद है।
नलिनी के वकील पुगलेंती के मुताबिक, जेल में पिछले 29 साल से बंद नलिनी के साथ ऐसा पहली बार हुआ जब उसने खुदकुशी करने का प्रयास किया। वकील ने बताया कि जेल में उम्र कैद की ही सजा काट रही एक अन्य कैदी से नलिनी का झगड़ा हुआ था। उस कैदी ने जेलर से शिकायत कर दी​। इसके बाद यह घटना हुई।

जेल प्रशासन ने किया इनकार
जेल प्रशासन ने नलिनी की खुदकुशी के प्रयास से इनकार किया है। जेल अधिकारियों का कहना है कि कैदी से झगड़े के बाद नलिनी से पूछताछ की गई थी। इसके बाद उसने खुदकुशी करने की धमकी दी थी लेकिन खुदकुशी के प्रयास की बात गलत है।

इस तरह हुई थी राजीव गांधी की हत्या

पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या 21 मई 1991 को कर दी गई थी। इसकी साजिश नवंबर 1990 में ही श्रीलंका के जाफना में रची गई। लिट्टे आतंकी प्रभाकरण और उसके साथी बेबी सुब्रह्मण्यम, मुथुराजा, मुरुगन और शिवरासन ने मिलकर हत्या की साजिश रची और इसकी जिम्मेदारी चार लोगों को सौंपी। लिट्टे आइडियोलॉग बेबी सुब्रह्मण्यम को हमलावरों के लिए ठिकाने का जुगाड़ करना था। प्रभाकरण के खास मुथुराजा को हमलावरों के लिए संचार व्यवस्था और रुपये के प्रबंध की जिम्मेदारी दी गई थी। विस्फोटक विशेषज्ञ मुरुगन को हमले के लिए जरूरी चीजों की व्यवस्था करनी थी और लिट्टे के जासूस शिवरासन ने हत्या को अंजाम देने का जिम्मा लिया था।

1991 में चेन्नई पहुंचे हमलावर

श्रीलंका में राजीव गांधी की हत्या की साजिश रचने के बाद बेबी सुब्रह्मण्यम और मुथुराजा 1991 की शुरुआत में चेन्नई पहुंचे। ये चेन्नई में सीधे शुभा न्यूज फोटो एजेंसी पहुंचे। एजेंसी के मालिक शुभा सुब्रह्मण्यम साजिश के लिए लोकल सपोर्ट मुहैया कराना था। बेबी सुब्रह्मण्यम ने सबसे पहले शुभा न्यूज फोटो एजेंसी में ही काम करने वाले भाग्यनाथन को अपने चंगुल में फंसाया। नलिनी इसी भाग्यनाथन की बहन है जो उस वक्त एक प्रिंटिंग प्रेस में काम करती थी। भाग्यनाथन और नलिनी की मां नर्स थी। नर्स मां को अस्पताल से मिला घर खाली करना था। इन मुश्किल हालात में घिरे भाग्यनाथन और नलिनी को आतंकी बेबी ने पैसे और मदद के झांसे में लिया। बेबी ने एक प्रिंटिंग प्रेस भाग्यनाथन को सस्ते में दिला दिया। इससे परिवार सड़क पर आने से बच गया। बदले में नलिनी और भाग्यनाथन बेबी के लिए कुछ भी करने को तैयार हो गए।

मदद कर फांस लिया

मुथुराजा ने शुभा न्यूज फोटो एजेंसी से ही दो फोटोग्राफरों रविशंकरन और हरिबाबू की मदद कर उन्हें जाल में फांस लिया। रविशंकरन और हरिबाबू शुभा न्यूज फोटोकॉपी एजेंसी में बतौर फोटोग्राफर काम करते थे लेकिन हरिबाबू को नौकरी से निकाल दिया गया था। मुथुराजा ने उन्हें विज्ञानेश्वर एजेंसी में नौकरी दिला दी। यही नहीं, श्रीलंका से बालन नाम के एक शख्स को बुला कर हरिबाबू का शागिर्द बना दिया। इससे हरिबाबू की कमाई बढ़ गई और वह मुथुराजा का मुरीद हो गया। मुथुराजा ने हरिबाबू को राजीव गांधी के खिलाफ भड़काया कि अगर वो 1991 के लोकसभा चुनाव में जीत कर सत्ता में आए तो तमिलों की दुर्गति हो जाएगी।

कम्प्यूटर इंजीनियर को भी साजिश में शामिल किया

श्रीलंका में बैठे मुरुगन ने जय कुमारन और रॉबर्ट पायस को भी चेन्नई भेजा। ये दोनों पुरूर के साविरी नगर एक्सटेंशन में रुके। वहां पर जयकुमारन का जीजा अरीवेयू पेरूलीबालन 1990 से ही छिपकर रह रहा था। वह लिट्टे का बम एक्सपर्ट था। वह कंप्यूटर इंजीनियर और इलेक्ट्रॉनिक एक्सपर्ट भी था। जय कुमारन और रॉबर्ट पायस ने मिलकर उसे बम बनाने के लिए तैयार किया।

चेन्नई आया मुरुगन

मुरुगन ने चेन्नई आकर साजिश को अंजाम तक पहुंचाने के लिए प्रयास ​तेज किया। उसके इशारे पर जयकुमारन और पायस भी नलिनि-भाग्यनाथन-बेबी-मुथुराजा के ठिकाने पर पहुंच गए। मुरुगन ने जयकुमारन और पायस की मदद से सभी का फर्जी ड्राइविंग लाइसेंस बनवाया। इसके बाद मुरुगन, मुथुराजा और बेबी ने मिलकर चेन्नई में छिपने के तीन महफूज ठिकाने खोज लिए। अब साजिश को अंजाम देने की तैयारियां हो चुकी थीं। अरीवेयू के तौर पर एक बम बनाने वाला तैयार था। राजीव गांधी के खिलाफ नफरत से भरे नलिनी पद्मा और भाग्यनाथन थे। शुभा सुब्रह्मण्यम भी तैयार था। मार्च की शुरुआत में शिवरासन समुद्र के रास्ते चेन्नई पहुंचा। वो पोरूर में पायस के घर में रुका। इसी घर को साजिश को अमल में लाने के लिए कंट्रोल रूम का रूप दे दिया गया।

शिवरासन ने संभाली कमान

शिवरासन ने साजिश की कमान अपने हाथ में ली और बेबी व मुथुराज को श्रीलंका वापस भेज दिया। चेन्नई में नलिनी, मुरुगन और भाग्यनाथन के साथ शिवरासन ने मानवबम खोजने की कोशिश की पर कोई भी तैयार नहीं हुआ। इसके बाद मानवबम के इंतजाम के लिए शिवरासन फिर समुद्र के रास्ते जाफना वापस गया और प्रभाकरण से मिला। इसपर प्रभाकरन ने शिवरासन की ही चचेरी बहनों धनू और शुभा को उसके साथ भारत के लिए रवाना कर दिया।

समुद्र के रास्ते ले आया मानव बम

शिवरासन धनू और शुभा को लेकर अप्रैल की शुरुआत में चेन्नई आया। धनू और शुभा को नलिनी के घर ले गया, जहां मुरुगन भी मौजूद था। शिवरासन ने बेहद शातिर तरीके से पायस- जयकुमारन-बम डिजायनर अरिवेयू को इनसे अलग रखा और खुद पोरूर के ठिकाने में रहता रहा। शिवरासन ने टारगेट का खुलासा किए बिना बम एक्सपर्ट अरिवेयू से एक ऐसा बम बनाने को कहा जो महिला की कमर में बांधा जा सके। अरिवेयू ने एक ऐसी बेल्ट डिजाइन की जिसमें छह आरडीएक्स भरे ग्रेनेड जमाए जा सकें। हर ग्रेनेड में अस्सी ग्राम C4 आरडीएक्स डाला गया। बम को इस तरह से डिजाइन किया गया कि धमाका हो तो टारगेट बच न सके।

20 मई की रात ही कर ली तैयारी

लोकसभा चुनाव के दौरान राजीव गांधी की बैठक 21 मई को श्रीपेरंबदूर में तय थी। नलिनी के घर 20 मई की रात धनू ने पहली बार सुरक्षा एजेंसियों को चकमा देने के लिए चश्मा पहना। शुभा ने धनू को बेल्ट पहना कर प्रैक्टिस करवाई। 20 मई की रात को सभी ने साथ मिलकर फिल्म देखी और सो गए। सुबह शिवरासन-धनू-शुभा-नलिनी और हरिबाबू साजिश को अंजाम देने के लिए पूरी तरह तैयार थे।

माला पहनाई, पैर छुई और जोर का धमाका हुआ

21 मई को श्रीपेरंबदूर में राजीव गांधी की रैली शुरू हुई। धनू राजीव गांधी के पास पहुंची तो एक महिला पुलिस अधिकारी ने उसे दूर कर दिया लेकिन राजीव गांधी ने कहा कि सबको आने दीजिए। उन्हें नहीं पता था कि वो जनता को नहीं मौत को पास बुला रहे हैं। धनू ने माला पहनाई, पैर छूने के लिए झुकी। राजीव गांधी उसे उठाने के लिए नीचे झुके तभी उसने बम का ट्रिगर दबा दिया। उसकी कमर के साथ ही राजीव गांधी का चेहरा पूरी तरह से उड़ गया। उनके चेहरे की हड्डियां 100 मीटर से भी ज़्यादा दूर तक उड़ गई थीं। उन्हें बिना उनके चेहरे के दफनाया गया था।

तभी से जेल में है नलिनी

इस केस की जांच के लिए सीआरपीएफ़ के आईजी डॉक्टर डीआर कार्तिकेयन के नेतृत्व में विशेष जांच दल का गठन किया गया था। जांच के बाद एलटीटीई यानि लिट्टे के सात सदस्यों को गिरफ़्तार किया गया। मुख्य अभियुक्त शिवरासन और उसके साथियों ने गिरफ़्तार होने से पहले साइनाइड खा लिया। नलिनी को भी फांसी की सजा हुई थी। लेकिन, उसने एक बच्चे को जन्म दिया तो उसकी भविष्य की खातिर राजीव गांधी की पत्नी सोनिया गांधी ने नलिनी की फांसी की सजा टालने का अनुरोध किया। इसके बाद नलिनी की सजा उम्रकैद में बदल दी गई।

0 0 vote
Article Rating

By Shekhar

E-mail : unbiasedshekhar@gmail.com

यह आर्टिकल आपको कैसा लगा? नि:संकोच अपनी निष्पक्ष राय रखिए।

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

0 Comments
Inline Feedbacks
View all comments
0
Would love your thoughts, please comment.x
()
x