2 अगस्त 1987 का दिन शतरंज के इतिहास में भारत के लिए एक स्वर्णिम अध्याय लेकर आया।साल 1987 में विश्वनाथन आनंद  फिलिपींस में आयोजित विश्व जूनियर शतरंज चैंपियनशिप जीतकर पहले ऐसे एशियाई खिलाड़ी बने जिसने ये खिताब अपने नाम किया था।

आंखों पर चश्मा और चेहरा जैसे भाव शून्य, चेहरे को देखकर कोई कह ही नहीं सकता कि दिमाग में क्या चल रहा है। शायद तभी उन्हें माइंड मास्टर कहकर भी बुलाते हैं। हम बात कर रहे हैं शतरंज के बादशाह, कई खिताबों को अपने नाम करने वाले विश्वनाथन आनंद की। जिनकी दुनिया चेस की 32 गोटियों और 64 खाने के ईर्द गिर्द घूमती हैं। ऐसा लगता है मानो दोनों एक दूसरे के पूरक हों।

…तो आइए आज आपको विश्वनाथन आनंद की ज़िंदगी से जुड़ी कुछ ख़ास बातें बताते हैं।

  • 11 दिसंबर 1969 को तमिलनाडु के मयीलाडुतरै में विश्वनाथन आनंद का जन्म हुआ। उन्हें प्यार से विशी कहकर बुलाते हैं। लेकिन उन्हें आनंद विश्वनाथन कहलाना ज्यादा पसंद है।
  • विश्वनाथन आनंद ने मात्र 6 साल की उम्र से चेस खेलना शुरु किया। उनकी मां उनकी पहली गुरु थीं।
  • विश्वनाथन आनंद के पिता को जब फिलीपींस में काम करने का मौका मिला तो मनीला में आठ साल की उम्र में उनकी मां उन्हें रोज़ चेस की क्लास के लिए ले जाया करती थीं। जब तक क्लास खत्म न हो जाए, तब तक वे बाहर ही बैठकर इंतज़ार करती थीं।
  • एक बार सिमी ग्रेवाल ने अपने शो में उनसे पूछा कि अगर आप चेस प्लेयर नहीं होते तो क्या होते, इस सवाल के जवाब में वे थोड़ी देर चुप हो गए और फिर बोले कि मैं इस बारे में सोच भी नहीं पाता।
  • विशी यानी विश्वनाथन आनंद देश के पहले ग्रैंड स्लैम मास्टर हैं। ये खिताब उन्हें साल 1988 में मिला।
  • पांच वर्ल्ड चेस चैंपियनशिप का खिताब विश्वनाथन आनंद के नाम है।
  • लगातार 21 महीने तक वर्ल्ड चेस में पहले स्थान पर रह चुके हैं।
  • राजीव गांधी खेल रत्न अवॉर्ड पाने वाले वह पहले खिलाड़ी हैं। 
  • 2007 में विश्वनाथन आनंद को पद्म विभूषण से नवाज़ा गया। 
  • इसके अलावा अर्जुन अवॉर्ड, पद्मश्री और पद्मभूषण से भी विश्वनाथन आनंद को सम्मानित किया जा चुका है।
  • उन्हें टाइगर ऑफ मद्रास भी कहा जाता है।
  • वो अकेले ऐसे खिलाड़ी हैं जिन्हें 7 नवंबर 2010 में तत्कालिन पीएम मनमोहन सिंह द्वारा यूएसए के प्रेसिडेंट बराक ओबामा के लिए दिए गए भोज में शामिल किया गया था।


विश्वनाथन आनंद एक ऐसी शख्सियत हैं जिन्हें बचपन से पता था कि उन्हें क्या करना है, उन्होंने अपनी मेहनत और लगन के दम पर अपनी मंज़िल के पते को बदलने नहीं दिया और बन गए किंग ऑफ चेस। We are really proud of you Vishi.

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By Shekhar

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