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शारदीय नवरा​त्रि | संपूर्ण पूजन विधि, महात्म्य और शुभ मुहूर्त

ByChetna Tyagi

अक्टूबर 17, 2020

आज से शारदीय नवरात्रि प्रारंभ हो रही है। वैसे नवरात्रि पितृ विसर्जन अमावस्या के दूसरे दिन से प्रारंभ होती है। परंतु, इस बार अधिकमास के कारण इसमें एक माह का विलंब हुआ है। अत: नवरात्रि आज, शनिवार, 17 अक्तूबर 2020 से प्रारंभ हो रही है।

कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त

शुभ मुहूर्त : प्रात:7:23 बजे से 8:50 बजे तक
वृश्चिक लग्न : प्रात: 8:17 बजे से 10:34 बजे तक
अभिजीत मुहूर्त : प्रात: 11:20 बजे से दोपहर 12 :06 बजे तक
(काशी समयानुसार)
• गुवाहाटी, असम के श्रद्धालु काशी के समय से 34 मिनट कम करते हुए शुभ मुहूर्त समझें।
• दिल्ली के श्रद्धालु काशी के समय में 31 मिनट जोड़ते हुए शुभ मुहूर्त प्राप्त करें।
• मुंबई के श्रद्धालु काशी के समय में 30 मिनट का धन संस्कार करें। अर्थात् 30 मिनट जोड़ते हुए शुभ मूहर्त समझें।

नवरात्रि की पूजन विधि

काशी के आचार्य राजेश के अनुसार, प्रतिपदा यानि आज प्रात: उठकर घर में कलश की स्थापना करें। मां भगवती दुर्गा का नौ दिन तक नित्य पूजन—अर्चन करें। आज से नौ दिनों तक निराहार रहकर फलाहार करते हुए मां भगवती की आराधना करनी चाहिए। नवमी के दिन पूजन के बाद हवन करने के उपरांत नौ कुमारी के साथ बटुक भैरव का ससम्मान भोजन कराना चाहिए। उन्हें विभिन्न प्रकार के मिष्ठान, पकवान बनाकर खिलाना चाहिए और उन्हें वस्त्र आदि दान करना चाहिए।

नौ दिनों की पूजा से प्रसन्न होती हैं मां

नौ दिनों तक विधि—विधानपूर्वक मां की पूजा—अर्चना करने से शक्ति की अधिष्ठात्री देवी मां भगवती दुर्गा प्रसन्न होकर मनोवांछित फल प्रदान करती हैं। जो कोई भी भगवती का नौ दिनों तक सात्विक आचार—विचार के साथ पूजन—अर्चन करता है, उसे व उसके परिवार को मां दुर्गा विद्या, धन, संपदा एवं शक्ति प्रदान करती हैं।

नौ ग्रहों की होती है शांति

देवी भागवत के अनुसार, प्रतिपदा से लेकर नवमी तक नौ दिनों तक जो मां दुर्गा की आराधना करने से नौ ग्रहों की शांति होती है। अतः जिस किसी को भी नवाग्रह का अशुभ फल प्राप्त हो रहा है या ग्रह पीड़ा सता रही है, उसे आज से नौ दिनों तक मां भगवती की आराधना करनी चाहिए। मां दुर्गा सप्तशती का पाठ करने से नवग्रह शांत हो जाते हैं, ऐसा देवी भागवत का वचन है।

नौ दिनों में किस दिन, किस रूप की पूजा करें?

आचार्य राजेश के अनुसार, नौ दिनों तक चलने वाले इस पर्व में व्रत और पूजा का विशेष महत्व है। नवरात्रि में मां के नौ स्वरूपों की पूजा होती है। प्रत्येक दिन एक स्वरूप की पूजा का विधान है। मां के नौ स्वरूप हैं। प्रथम दिन घटस्थापना होती है। शैलपुत्री को प्रथम देवी के रूप में पूजा जाता है। नवरात्रि के प्रथम दिन देवी शैलपुत्री की ही पूजा होती है। द्वितीय दिन ब्रह्मचारिणी की आराधना की जाती है। तृतीय दिन चंद्रघंटा की स्तुति की जाती है। चतुर्थ दिन कुष्मांडा की अर्चना होती है। पंचम दिन स्कंदमाता की पूजा होती है। षष्टम दिन कात्यायनी की प्रार्थना होती है। सप्तम दिन कालरात्रि का और अष्टम दिन महागौरी का पूजन—अर्चन किया जाता है। नवम दिन यानी कि नवमी को सिद्धिदात्री की पूजा का विधान है।

आप सभी श्रद्धालुजन को नवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाएं!
समस्त सृष्टि की मंगलकामना के साथ,
आचार्य राजेश | काशी

(पूजन समय या विधि के संबंध में किसी भी तरह की भ्रम की स्थिति होने पर आचार्य राजेश के व्हाट्सएप नंबर 7007668977 पर संपर्क किया जा सकता है।)

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Chetna Tyagi

E-mail : unbiasedchetna@gmail.com

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