मंगल. अक्टूबर 20th, 2020
आज से चातुर्मास का पवित्र महीना श्रावण अथवा सावन प्रारंभ हो रहा है। यह संयोग ही है कि इस बार सावन की शुरुआत भगवान शिव के प्रिय दिन सोमवार से हो रही है। काशी के आचार्य राजेश के अनुसार, आज से पूरे सावन मास के दौरान सभी संतों के साथ—साथ गृहस्थ जीवन में रहने वालों को भी श्रावणी व्रत का पालन करना चाहिए।

सोमवार का संयोग

शिव भक्तों को पता है कि भगवान भोलेनाथ को सोमवार का दिन कितना प्रिय है। इसीलिए सावन में सोमवार को पूजा के लिए सबसे अधिक भीड़ होती है। इस बार यह सुखद संयोग है कि सावन मास की शुरुआत और समापन दोनों ही सोमवार से हो रहा है। पूरे सावन मास में पांच सोमवार का भी अद्भुत संयोग बन रहा है। दूसरी सोमवारी 13 जुलाई, तीसरी सोमवारी 20 जुलाई, चौथी सोमवारी 27 जुलाई और पांचवीं सोमवारी सह श्रावण पूर्णिमा 3 अगस्त को पड़ रही है।

भोले को क्यों प्रिय है सावन?

पौराणिक कथा के अनुसार, देवी सती ने अपने पिता दक्ष के घर में योगशक्ति से शरीर का त्याग कर दिया। उन्होंने इससे पहले ही महादेव को हर जन्म में पति के रूप में पाने का प्रण किया था। अपने दूसरे जन्म में देवी सती ने पार्वती के नाम से हिमाचल और रानी मैना के घर में पुत्री के रूप में जन्म लिया। पार्वती ने श्रावण महीने में निराहार रहकर कठोर व्रत किया और भगवान शिव को प्रसन्न कर उनसे विवाह किया। तभी से महादेव के लिए यह माह विशेष हो गया।

एक समय भोजन का नियम

स्कंदपुराण के अनुसार, सावन महीने में एकभुक्त व्रत करना चाहिए। अर्थात एक समय ही भोजन करना चाहिए। इसके साथ ही पानी में बिल्वपत्र या आंवला डालकर नहाना चाहिए। इससे जाने-अनजाने में हुए पाप खत्म हो जाते हैं। वामन पुराण के अनुसार श्रावण मास में एक बार भोजन करने के साथ ही भगवान विष्णु और शिव का अभिषेक करना चाहिए।

पार्थिव पूजन का भी विधान

आचार्य राजेश के अनुसार, गृहस्थ जीवन में रहने वाले सभी व्यक्तियों को पार्थिव पूजन करना चाहिए। इसका मतलब यह है कि आज से सभी व्यक्तियों को शुद्ध मिट्टी से शिवलिंग तैयार करना चाहिए और जल, दूध, दही, घी, मधु, शक्कर, फूल, दूब, बेलपत्र, चंदन भस्म आदि से पार्थिव शिवलिंग का अभिषेक करना चाहिए। स्वादिष्ट पकवान और फल—मूल का भोग लगाना चाहिए। सायं काल पवित्र नदी में पार्थिव का विसर्जन करना चाहिए। इससे भगवान भोलेनाथ प्रसन्न होकर सभी मनोरथ पूरा करते हैं।

By Unbiased Desk

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