बुध. सितम्बर 30th, 2020
आज देवशयनी एकादशी है। आषाढ़ शुक्ल पक्ष की एकादशी को यह एकादशी होती है। देवशयनी एकादशी को पद्मा एकादशी, आषाढ़ी एकादशी और हरिशयनी एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। देवशयनी एकादशी भगवान विष्णु के विश्राम काल का आरंभ होता है।

देवशयनी एकादशी के दिन से ही भगवान विष्णु का शयनकाल शुरू होता है, इसीलिए इसे देवशयनी एकादशी कहते हैं। इसी समय से चातुर्मास की शुरुआत भी हो जाती है। इस समय कोई मांगलिक या भौतिक कार्य तो नहीं होता, लेकिन तपस्या होती है। आज के दिन से संत समाज, साधु समाज अपने स्थान पर रहकर 4 महीने तक तपस्या करते हैं। इसलिए इसे चातुर्मास भी कहा जाता है। इसे बहुत ही पवित्र माह माना जाता है। 

भगवान शिव देखते हैं इस दौरान पृथ्वी के कार्य
चातुर्मास में भगवान विष्णु धरती का कार्य भगवान शिव को सौंप देते हैं। भगवान शिव चातुर्मास में धरती के सभी कार्य देखते हैं। इसीलिए चातुर्मास में भगवान शिव की उपासना को विशेष महत्व दिया गया है। सावन का महीना भी चातुर्मास में ही आता है। भगवान आशुतोष देवों के देव महादेव को पूरे श्रावण माह तक गंगाजल या पवित्र नदी के जल से अभिषेक करना चाहिए।

148 दिनों का है चातुर्मास
आचार्य राजेश शास्त्री के अनुसार, आज से ही चार्तुमास आरंभ हो गया है। इस बार चातुर्मास 148 दिनों का है। यह 25 नवंबर को समाप्त होगा। 25 नवंबर को देवोत्थानी एकादशी पर भगवान विष्णु अपने शयन कक्ष से बाहर आ जाएंगे। इसी के साथ मांगलिक कार्य शुरू हो जाएंगे।

इस बार मलमास भी
इस बार अधिकमास अथवा मलमास भी है। माना जाता है कि जिस वर्ष 24 एकादशी की जगह 26 एकादशी होती हैं, उस वर्ष चातुर्मास अधिक लंबा होता है। इस बार ऐसा ही हो रहा है। इस कारण चार्तुमास की अवधि इस बार करीब पांच माह की रहेगी।

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By Unbiased Desk

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