जिसके साथ होने भर से ज़िंदगी खेलने भी लगे, खिलखिलाने भी, शरारतें भी करने लगे और मुस्कुराने भी, वही तो है दोस्त। जिससे बात करने से पहले सोचना न पड़े कि वो बुरा मान गया तो? अरे, जो किसी बात का बुरा मान जाए वो दोस्त ही कैसा? छोटी—छोटी बातों पर मुंह फूला लेना और अगले ही पल गले लग जाना और लौट आना अपनी मस्ती—मज़ाक की दुनिया में, वही तो है दोस्त। दूर हो या पास, फिर भी जो दे साथ, वही तो है दोस्त। और आज का दिन है उसी दोस्त के नाम। यानी आज है फ्रेंडशिप डे। 

… तो आइए आपको बताते हैं कि आखिर इस दिन की शुरुआत कैसे हुई? इसके पीछे की कहानियां आज हम आपको सुनाएंगे।

कहानी नं 1

1935 में अमेरिकी सरकार ने अगस्त के पहले रविवार को एक शख्स को मार दिया, जिसके बाद उसकी याद में उसके दोस्त ने खुदकुशी कर ली। उस दिन से अमेरिकी सरकार ने अगस्त के पहले रविवार को फ्रेंडशिप डे मनाने का ऐलान कर दिया।

कहानी नं 2

कुछ लोग साल 1930 से फ्रेंडशिप डे की शुरुआत मानते हैं। जोएस हाल नाम के एक व्यापारी ने 2 अगस्त का दिन अपने दोस्तों के साथ मनाने का तय किया। इस दिन दोस्तों ने एक दूसरे को कार्ड देकर अपने दोस्ती के अहसास साझा किए जिसके बाद यूरोप और एशिया के बहुत से देशों ने फ्रेंडशिप डे मनाने की शुरुआत की।

कहानी नं 3

कहते हैं कि 20 जुलाई 1958 को डॉक्टर रमन आर्टिमियो ने एक डिनर पार्टी के दौरान पराग्वे में फ्रेंडशिप डे मनाने का प्रपोज़ल दिया था जिसके बाद इस दिन को मनाने की बात की जाने लगी।

… तो तारीख चाहें जो भी हो, दिन चाहे कोई भी हो, बस याद इतना रखना कि हर एक फ्रेंड ज़रुरी होता है क्योंकि एक दोस्त ही करता है आपकी लाइफ को कंप्लीट। क्यों ठीक कहा न?
टीम UNBIASED INDIA की तरफ से सभी को International Friendship Day की शुभकामनाएं!
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By Unbiased Desk

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