बुध. सितम्बर 30th, 2020

कहने को सब ही हैं ख़ास,
फिर क्यों नहीं है कोई पास ?
गर सभी अपने हैं,
फिर क्यों नहीं होता अहसास?

अगर आपके या आपके पार्टनर के मन में भी ये चार लाइनें गाहे—बगाहे आती रहती हैं तो आप इस आर्टिकल को पूरा पढ़िएगा।

दो लोग मिलते हैं, एक दूसरे की तरफ आकर्षित होते हैं। एक दूसरे की छोटी—छोटी बातों पर ध्यान देते हैं, ख्याल रखने लगते हैं, साथ—साथ वक्त गुज़ारने लगते हैं और फिर एक दिन इज़हार—ए—इश्क़ होता है। इसके बाद एक—दूसरे का और भी ख्याल रखने लगते हैं। एक—दूसरे के साथ वक्त बिताने के मौके कुछ इस कदर तलाशने लगते हैं कि और किसी के लिए वक्त बचता ही नहीं। प्यार, प्यार और बहुत सारा प्यार करते हैं। ई—मेल से लेकर फोन तक का पासवर्ड तक पार्टनर के नाम पर सेट हो जाता है।

…और फिर अचानक एक दिन उनमें से कोई एक पासवर्ड बदल लेता है। अचानक वो फोन कॉल्स जिनका इंतज़ार रहा करता था, वो बोझ लगने लगती हैं। वो जो दो से एक हुए थे, उनमें से अचानक एक का अस्तित्व ही दूसरे के लिए खत्म हो जाता है। और यहां से शुरू होता है लव स्टोरी या किसी भी रिलेशनशिप में ट्विस्ट। सवाल ये कि आखिर ऐसा होता क्यों है?

… शायद इसलिए क्योंकि जब हमारा प्यार परवान चढ़ रहा होता है तो हम देख ही नहीं पाते कि किसी का होने में हम खुद को खो रहे हैं। जब आप खुद को किसी और के हिसाब से ढालने लगते हैं तो आप खुद ही आइने के लिए अनजान बन जाते हैं तो भला उस इंसान के लिए क्यों न होंगे जिसे आप प्यार करते हैं या फिर जिसने कभी आपसे प्यार किया था।

आप अपने पार्टनर को जितना कम महसूस कर पाते हैं, बेचैनी उतनी ही ज्यादा बढ़ती जाती है। आप वक्त चाहते हैं और अचानक आपके हिस्से का वक्त कभी काम में या कई बार किसी और के हिस्से में आ चुका होता है। कुल मिलाकर सिचुएशन ऐसी कि आप उन प्यार भरे पलों के लिए तरसने लगते हैं जो आपने साथ जिए थे। जब वो नहीं मिलता तो निराशा, गुस्से के रुप में बरसती है।

खैर, अब मैं आपको कुछ छोटे—छोटे टिप्स देने जा रही हूं, Hope it ll work, और अगर कुछ मैजिक हो जाए तो कमेंट करके बताइएगा जरूर।

  • सबसे पहले ये सोचिए कि आखिर आपका पार्टनर आपको समझ क्यों नहीं पा रहा, कहीं वाकई आप जाने अनजाने ऐसा कुछ तो नहीं कर रहे या कर बैठे हैं कि आपने अपने बेटर हाफ का भरोसा खो दिया।
  • कभी भी अपने पार्टनर से झूठ मत बोलिए। विश्वास मानिए किसी भी रिश्ते को खत्म करने के लिए आपका एक छोटा सा झूठ काफी होता है। अक्सर मैं लोगों को कहते सुनती हूं कि यार, वो बहुत शक करती है या मेरा पार्टनर मेरा फोन चेक करता रहता है। ऐसा तभी होता है जब इश्क की इमारत में सेंधमारी होती है।
  • मैंने कहीं पढ़ा था कि अगर सच बोलने में ज़ुबान में छाले पड़ने लगें तो झूठ भी मत बोलो। आपको लगता है कि क्या हुआ एक झूठ बोलने से अगर रिश्ता बचता है तो.. नहीं, ऐसा करने से आप रिश्ते के साथ—साथ सामने वाले को भी खत्म कर रहे हैं, क्योंकि छोटा हो या बड़ा, झूठ पर से परदा हटता ज़रुर है। तो बेहतर है कि आप सच बोलें।
  • जब भी अपने पार्टनर की किसी बात पर गुस्सा आए, एक बार खुद को उनकी जगह पर रखकर जरूर सोचें कि अगर वो ऐसा कुछ करतीं तो आपको कैसा लगता। मसलन, अक्सर लड़के या लड़की जब अपनी पार्टनर के अलावा किसी अन्य लड़की या लड़के के साथ वक्त बिताते हैं तो They think its so cool, we are just good friends, पर खुद उनसे ये बर्दाश्त नहीं होता कि उनकी या उनका पार्टनर किसी की तरफ मुस्कुराकर देख भी ले। मैं ऐसा बिल्कुल नहीं कह रही कि आपके पार्टनर के अलावा किसी से बात या दोस्ती गुनाह है, लेकिन ये आपको तय करना होगा कि उसके दायरे कहीं इतने तो नहीं बढ़ रहे कि आपका साथी ख़ुद को आपकी ज़िंदगी से बाहर महसूस करने लगा हो।
  • रिश्ते में पहल करना सीखिए। दुनिया में ऐसा कोई रिश्ता ही नहीं जिसमें कभी खटास, कभी मिठास न होती हो। पर सामने वाला पहल न कर रहा हो तो आप पहल कीजिए। इस बात पर भी ध्यान दिजिए कि कहीं ऐसा तो नहीं कि हर बार पहल आप ही कर रहे हों, क्योंकि प्यार दोनों को है तो परवाह भी दोनों को करनी चाहिए।
  • हमेशा कुछ न कुछ नया जरूर कीजिए। जैसे कभी एक साथ घर सजाया, एक—दूसरे के साथ कोई गेम खेलिए, पर रिश्ते को गेम मत बनाइए। अच्छा म्यूजिक सुनिए, साथ मिलकर खाना बनाइए, एक—दूसरे को बताइए कि आप एक—दूसरे के लिए कितने जरूरी हैं। ये बातें रिश्ते की शुरुआत में जितनी जरूरी होती हैं, उससे कहीं ज्यादा बाद में होती हैं।
  • एक—दूसरे पर चीखने—चिल्लाने की जगह शांत होकर बातें कीजिए, समझने की कोशिश कीजिए कि आखिर जिस इंसान के नंबर डिस्प्ले के साथ चेहरे पर खुशी छलकने लगती थी, आखिर उसका चेहरा आपको इतनी झुंझलाहट से क्यों भर रहा है।
  • अगर आपको लगने लगा है कि आप अपने पार्टनर के साथ खुश नहीं है तो उन्हें बता दीजिए, पर अपने मन के बदलने का ज़िम्मेदार उन्हें मत ठहराइए, क्योंकि आपको कोई और पसंद आने लगा, इसमें आपके साथी की क्या ग़लती।
  • रिश्ते में ईमानदार रहिए। साथ रहिए। सच बोलिए।
  • कोई भी रिलेशनशिप दो लोगों से बनती है, उसका कामयाब होना या नाकामयाब होना भी उन दोनों पर ही निर्भर करता है। तो कोशिश कीजिए कि रिलेशन में टेंशन भले आए पर वो आप दोनों की मुस्कान देखकर ही भाग जाए। प्यार में इकरार है तो इंतज़ार भी और तकरार भी, पर कोशिश कीजिए कि तकरार के बाद प्यार का मौसम जल्दी से आ जाए इससे पहले कि दोनों में से कोई एक खुद को अकेला महसूस करने लगे। साथ रहिए, साथ होने का अहसास रखिए।
(नोट- इस आर्टिकल का संबंध प्यार को रेलवे स्टेशन समझने वालों से बिल्कुल नहीं है। या फिर उनसे तो बिल्कुल नहीं जिनकी फितरत में कभी ये डाल तो कभी वो डाल है। बल्कि उनके लिए है जो अपने रिश्ते को खो बैठे हैं और अब वापसी करना चाहते हैं या वापस हासिल करना चाहते हैं।)

With Love,
Harshita

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By Harshita

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