UNBIASED india | हिंदी

सच से सरोकार

Category : सृजन

सभी की प्रतिभा की कद्र जरूरी है…

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मैं ज़िंदगी का दीया जलाती हूं!

जिंदगी को जब मैं अपने रंग दिखाती हूँ,वो दीया बुझाती हैं, मैं दीया जलाती हूं! मैं उदास रातों में ढूंढ़ती हूं ख़ुद को ही,जब कहीं नही मिलती, थक के सो जाती हूँ! कुछ नजर नहीं आता मुझे अँधेरे में,कौन है जिसे अपनी उंगलियां थमाती हूँ! खुशबू आती है, जिसके पास आने से,जानती नहीं लेकिन रोज […]Read More

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Daughter’s Day | बेटियां

चिड़ियों की झुंड सीचहचहाती हैं बेटियां,पगडंडियों पर नीले—पीले आंचल उड़ाती हैं बेटियां!आंगन की तुलसी बन घर को महकाती हैं बे​टियां,हंसी—ठिठोली कर सबका मन बहलाती हैं बेटियां!पायल की रूनझुन सी गुनगुनाती है बेटियां,पानी सी निर्मल—स्वच्छ नजर आती हैं बेटियां!क्यों देखते हैं दोयम निगाहों से इन्हें जमाने वाले?किसी भी मकान को घर बनाती हैं बेटियां।। (डॉटर्स डे […]Read More

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हैप्पी बर्थडे… चन्नर काका

प्रेमचंद की जयंती पर विशेष कथा सम्राट प्रेमचंद का नाम कौन नहीं जानता? आज उनकी जयंती है। 31 जुलाई 1880 को वाराणसी के लमही में जन्मे प्रेमचंद का 8 अक्टूबर 1936 को निधन हो गया था। आज प्रेमचंद की जयंती पर गोरखपुर की अर्पण दूबे ने उन्हें चन्नर काका के रूप में संबोधित करते हुए […]Read More

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अजीब सी चाहत है मेरी…

बड़ी अजीब चाहत है मेरी,जहाँ नहीं होता कुछ भीमैं वहीँ सबकुछ पाना चाहती हूँ, वहीं पाना चाहती हूँमैं अपने सवालो के जवाबजहाँ लोग बर्षो से चुप हैं, चुप हैं किउन्हें बोलने नहीं दिया गयाचुप हैं किक्या होगा बोलकरचुप हैं किवे चुप्पीवादी हैं, मैं उन्ही आंखों मेंअपने को खोजती हूंजिनमें कोई भी आकृतिनहीं उभरती, मैं उन्हीं […]Read More

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इश्क़ और बारिश…

इश्क का नशा औरबारिश की एक बूंद,दोनों एक से है।प्यार में बावरा मन औरठंडी हवाओं में झूमता वृक्ष,दोनों एक से हैं।आंखों में बसे मोहब्बत के वो हसीन सपने औरबारिश के स्पर्श से चमकते पेड़ों के वो पत्ते,दोनों एक से हैं।आशिकी की वो धुन औरखुले आसमानों में मचलते परिंदों का वो झुंड,दोनों एक से हैं।इश्क की […]Read More

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मन भयो तोहार पिया…

सवनी ई सुंदर फुहार पियामन भयो तोहार पिया ना… अबकी आम के बगानओहि कजरी उठान बही सावन गीत के फुहार पियामन भयो तहार पिया ना… बड़की नीमिया के डारदेबो झूला एक डार संग पेनिये उड़ईबो जवार पियामन भयो तोहार पिया ना… लहके मेहंदी के डारिरंग देली चटकारि रंगे नाधब तोहरो दुलार पियामन भयो तोहार पिया […]Read More

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पीपल और गुलमोहरी का मौन प्रेम

आरी कुल्हाड़ी झेलती हुई गुलमोहरी का अस्तित्व आज नष्ट ही होने वाला था कि उसने पीपल से कहा सुनो ..मैं भी तुमसे प्रेम करती हूं। मेरे रंगीन रूप ने तुम्हें समझने में हमेशा अवरोध उत्पन्न किया। मैं अपनी मुग्ध मनोरमता के कारण तुम्हें पहचान न सकी। आज इतनी आसानी से टूटने पर मुझे एहसास हो […]Read More

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चाहतों को मुख्तसर कर दिया…

सारी दुनियां से ही बेखबर कर दिया,उसने मुझपे ये कैसा असर कर दिया। कर दिया बूंद को वो समंदरऔर मेरी चाहतों को मुख्तसर कर दिया। जगाई है मुझमें ऐसी मुहब्बत,मुहब्बत को दिल का डगर कर दिया। जाने क्या बात उसमें थी,दिल को मेरे वो अपना घर कर दिया। उसमें दिखने लगा नूर रब का,हर दुआ […]Read More

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रोटी सबसे बड़ी

मेरे भी कई ख्वाब थे,उन ख्वाबों मेंगगन को छू लेने जैसे अहसास थे पर,हकीकत की दुनिया बड़ी कठिन थीये भूख भी बड़ी जालिम निकलीवो रोटी जो सामने थी खड़ीकलम की ज़रूरत से थी बड़ी रोटी की खोज लेकर जहां जाती हैउम्र बहुत बड़ी हो जाती हैअक्सर रोटी की तलाश मेंप्रतिभाएं गुम हो जाती हैं ना […]Read More

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कब्र पर कहानियां

खेतों की कब्रों पर लिखी गयी एकांत कहानियां, जहाँ पर आकाश का सूनापन मन के खाली गमलों को धीरे—धीरे अपने जब्त में ले रहा हो, ठीक उसी तरह जिस तरह मैं महसूस कर पा रही हूँ अपनी मासूमियत के कब्र पर बनी अनुभूति की कड़वी परत जो आहिस्ता—आहिस्ता दरकची बातों को वक्त के पालिश से […]Read More

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