<>राधाष्टमी | राधे के बिना अधूरी है कृष्ण की पूजा - UNBIASED INDIA >

राधाष्टमी | राधे के बिना अधूरी है कृष्ण की पूजा

आज राधाष्टमी है। जिस प्रकाश श्रीकृष्ण अष्टमी का महत्व है, उसी प्रकाश राधाष्टमी का भी अपना महत्व है। भाद्रपद शुक्ल पक्ष की अष्टमी को जगज्जननी पराम्बा भगवती राधा का जन्म हुआ था। अतः इस दिन राधाजी का व्रत करना चाहिए।

माना जाता है कि राधे की भक्ति के बिना श्रीकृष्ण की पूजा अधूरी है। राधाष्टमी 16 दिनों तक मनाई जाती है। प्रति और संतान की लंबी उम्र के साथ ही सभी मनोकामनाओं की सिद्धि के लिए इस व्रत का विधान है।

राधाष्टमी का महत्व

शास्त्रों के अनुसार, राधा को शाश्वत शक्तिस्वरूपा और भगवान श्रीकृष्ण के प्राणों की अधिष्ठात्री देवी के रूप में वर्णित किया गया है इसलिए भगवान श्रीकृष्ण इनके अधीन रहते हैं। ऐसे में कृष्ण की अराधना राधा के बिना अधूरी मानी जाती है। मान्यता तो यहां तक है कि जो राधा की पूजा नहीं करता, उसे कृष्ण की पूजा का भी अधिकार नहीं है। अतः राधा की अर्चना सभी को करनी चाहिए। श्री राधाष्टमी का व्रत करने से व्यक्ति को शुभ फल प्राप्त होने के साथ ही कृष्ण की कृपा भी प्राप्त होती है। जो राधा को प्रसन्न कर लेता है, वह स्वत: की कृष्ण की कृपा का पात्र हो जाता है।

ब्रज का रहस्य

मान्यता है कि राधाष्टमी का विधिपूर्वक व्रत करने से मनुष्य व्रज का रहस्य जानने योग्य हो जाता है। यही नहीं, वह राधा परिकरों में निवास करता है। इसी दिन दुर्वाष्टमी भी मनाई जाती हैै।

इस तरह करें राधाष्टमी पूजा

आचार्य राजेश के अनुसार, सुबह उठकर स्नान आदि कर सभी नित्यकर्मों से निवृत हो जाएं। किसी मंडप के भीतर मंडल बनाकर मध्य भाग में मिट्टी या तांबे का कलश स्थापित करें। कलश पर तांबे का ही पात्र रखें और पात्र के ऊपर दो वस्त्रों से ढकी हुई श्री राधा की स्वर्णमयी सुंदर प्रतिमा स्थापित करें। इसके उपरांत राधा की पूजा करें। इस दिन पूरा उपवास करना चाहिए। सामथ्र्य न हो तो एकभुक्त उपवास भी रह सकते हैं। अगले दिन भक्ति पूर्वक सुवासिनी स्त्रियों को भोजन कराएं। साथ ही आचार्य को दान करें। इसके बाद स्वयं भी भोजन करें। इस प्रकार इस व्रत को समाप्त करना चाहिए।

Share this Article
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!