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हिंदी सिनेमा की ‘प्रथम महिला’ नरगिस दत्त

उनकी ज़ुबां ख़ामोश भी रहे, तब भी उनकी आंखें बोलती थीं, वो जिन्होंने मात्र 14 साल की उम्र में बड़े परदे पर कदम रखा। वो जिनके एक एक अंदाज़ और अदा की कायल पूरी दुनिया रही, तभी तो उन्हें हिंदी सिनेमा की प्रथम महिला का दर्जा दिया गया। उनके बाद बहुत सारी अभिनेत्रियों ने कोशिश की, लेकिन वे नरगिस से ये खिताब ले नहीं पाईं।

कनीज फातिमा से नरगिस तक

1 जून 1929 को कोलकाता में जन्मीं नरगिस की मां जद्दन बाई एक अभिनेत्री और फिल्म निर्माता थीं। यही वजह है कि बचपन से ही उन्हें फिल्मी माहौल मिला लेकिन उन्हें अभिनय पसंद नहीं था। फिर भी मात्र पांच साल की उम्र में बतौर बाल कलाकार वो परदे पर नज़र आईं। 14 साल की उम्र में कनीज फातिमा राशिद यानी नरगिस बड़े परदे पर पहली बार बतौर अभिनेत्री नज़र आईं, फिल्म का नाम था- तकदीर। लेकिन उन्हें एक ख़ास पहचान मिली 1948 में जब उनकी तीन फिल्में अनोखा प्यार, मेला और अंजुमन बैक टू बैक आईं।

नरगिस की लव लाइफ

वैसे तो नरगिस ने अपने दौर के तमाम अभिनेताओं के साथ काम किया, लेकिन उनकी और राजकपूर की जोड़ी बड़े परदे पर सुपरहिट रही। बरसात, अंदाज, जान-पहचान, प्यार, आवारा अनहोनी, आशियाना, आह, धुन, पापी, श्री 420, जागते रहो, चोरी चोरीजैसी कई फिल्मों में दोनों साथ साथ नज़र आए। रील लाइफ का ये साथ रियल लाइफ में प्यार में बदलने लगा। लेकिन ये प्यार अपने मुकाम को हासिल नहीं कर सका और दोनों अलग हो गए। राजकपूर से अलग होने के एक साल बाद नरगिस ने 1957 में फिल्म मदर इंडिया की शूटिंग शुरु कर दी। शूटिंग के दौरान ही सेट पर आग लग गई और नरगिस उसमें फंस गईं। लेकिन तब सुनील दत्त ने अपनी जान पर खेलकर नरगिस को बचाया। इसके बाद दोनों में प्यार हुआ और इस बार ये प्यार अपने मुकाम तक पहुंचा और दोनों ने शादी कर ली। कहते हैं कि इसके बाद राजकपूर ने बहुत ज्यादा शराब पीनी शुरु कर दी थी। इतना ही नहीं वो अपने हाथ को सिगरेट से जलाया करते थे ये जानने के लिए की कहीं वे सपना तो नहीं देख रहे।

और चली गईं नरगिस

नरगिस दत्त को कैंसर था। वो काफी लंबे समय तक इस बीमारी से लड़ती रहीं। फिर एक वक्त ऐसा भी आया जब एक तरफ वो लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर थीं और दूसरी तरफ एक महीने बाद उनके बेटे संजय दत्त की फिल्म रॉकी रीलीज़ होने वाली थी। नरगिस बहुत दर्द में थीं, लेकिन वे अपने बेटे की पहली फिल्म को देखने के लिए बहुत ज्यादा उत्सुक भी थीं। संजय दत्त की फिल्म 8 मई को रीलीज़ होनी थी, लेकिन नरगिस ने 3 मई 1981 को दुनिया को अलविदा कह दिया।

पर जाकर भी वो यहीं हैं, क्योंकि कलाकार अमर हैं और नरगिस मरा नहीं करतीं। टीम UNBIASED INDIA की तरफ से हिंदी सिनेमा की प्रथम महिला नरगिस को हैप्पी बर्थडे।

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