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वृक्षों की अंडरग्राउंड नेटवर्किंग

सूर्य की किरणें, हवाएं, पशु-पक्षी और ऊंचे-ऊंचे पेड़ इन सभी को आप रोज़ाना देखते और महसूस करते हैं। लेकिन क्या आपने कभी अपने पैरों तले, मिट्टी के अंदर किसी ऐसे नेटवर्क के बारे में सोचा जिसे पेड़ों की जड़ें और कवक मिलकर बनाते हैं? जी हां, धरती के अंदर एक ऐसा सूक्ष्म संसार है जिसकी आप और हम शायद ही कल्पना करते हैं।

क्या होती है माइकोराइज़ल नेटवर्किंग?

आम-तौर पर अधिकांश फंगस यानि कि कवक मिट्टी के साथ पेड़ों की जड़ों से गुथे रहते हैं। ये पेड़ों की जड़ों मे माइसीलियम के द्वारा एक नेटवर्क के रुप में स्थापित रहते हैं। माइसीलियम, कवक का वेजिटेटिव पार्ट होता है जो छोटे-छोटे धागेनुमा संरचना होती है। ये माइसीलियम एक दूसरे से एक साथ मिलकर एक जाल बना लेती हैं जिसे माइकोराइज़ल नेटवर्क कहते हैं। इस नेटवर्क के द्वारा पेड़ एक दूसरे के साथ पानी, नाइट्रोजन, कार्बन और अन्य खनिज पदार्थों का आदान—प्रदान करते हैं। जर्मन वन अधिकारी पीटर इसे वूडवाइब वेब कहते हैं जिसमें माइसीलियम के ज़रिए पेड़ एक दूसरे से बात करते हैं।

कैसे काम करती है माइकोराइज़ल नेटवर्किंग ?

माइकोराइज़ नेटवर्किंग पेड़ों में एक—दूसरे के अस्तित्व को बनाए रखने में भी अहम रोल निभाती है। उदाहरण के लिए किसी छायादार जगह पर उगने वाले एक नन्हे पौधे तक जब ज़रुरी मात्रा में प्रकाश नहीं पहुंच पाता और उसकी पत्तिया प्रकाश संश्लेषण नहीं कर पाती तो ऐसे में ज़िंदा रहने के लिए नन्हा पौधा पुराने और लंबे वृक्षों से इसी माइकोराइज़ल नेटवर्क के द्वारा ज़रुरी खनिज पदार्थ प्राप्त करते हैं। इंग्लैंड यूनिवर्सिटी ऑफ रीडिंग द्वारा डगलस फिर पेड़ों पर किए गए अध्ययन में एक रोचक बात सामने आई है जिसके मुताबिक ये पेड़ अपने रिश्तेदारों यानि कि अपने जैसे दूसरे पेड़ों की जड़ों को पहचान लेते हैं और उन्हें फंगल नेटवर्क के माध्यम से कार्बन और खनिज पदार्थ भेजते रहते हैं।

क्या कहता है शोध?

पारिस्थितिकी विज्ञानी सूजेन सिमर्ड ने अपने शोध में पाया कि पेड़ों में कवक नेटवर्किंग, अपने कार्बन स्रोत को सुरक्षित रखने की आवश्यकता से प्रेरित होती है। कवक नेटवर्क माइसिलियम से जुड़े पेड़ों को स्वस्थ रखने और साथ ही साथ कवक की कार्बन आपूर्ति के लिए वितरक की तरह कार्य करती है। अपनी इस सेवा के बदले माइकोराइज़ल नेटवर्क 30 फीसदी शर्करा प्राप्त करता है जो कि एक दूसरे से जुड़े पेड़ प्रकाश संश्लेषण द्वारा बनाते हैं। अब शर्करा, कवक को ऊर्जा प्रदान करती है, बदले में माइसिलियम फॉस्फोरस और अन्य खनिज पदार्थ इकट्ठा कर लेता है इसका इस्तेमाल पेड़ों द्वारा किया जाता है। पेड़ और कवक कनेक्शन में हब ट्री सबसे महत्वपूर्ण होते हैं। इन्हें मदर ट्री कहा जाता है जो सबसे ज्यादा अनुभवी पेड़ माने जाते हैं। आमतौर पर हब ट्री के पास सबसे ज्यादा कवक कनेक्शन होता है। इनकी जड़ें मिट्टी में नीचे पानी तक पहुंचती है जिसे ये नन्हे पौधों तक पहुचाते हैं। माइकोराइज़ल नेटवर्क के द्वारा ये हब पेड़ अपने पड़ोसी बीमार पेड़ों के संकट संकेतों का पता लगा लेते हैं और फिर वो उन्हें ज़रुरी पोषक पदार्थ पहुंचाते हैं।

निष्कर्षों से ये पता चलता है कि पेड़ों ने अपनी प्रजातियों के अस्तित्व को बचाए रखने के लिए जटील सहजीवी संबंध विकसित कर लिया है। माइकोराइजल नेटवर्क इस संबंध का एक मुख्य हिस्सा है। यूं तो कवक अपने फायदे के लिए काम करते हैं लेकिन इसी के ज़रिए वो बड़े से बड़े पेड़ों को स्वास्थ्य और अस्तित्व को संरक्षित करते हैं।

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