राहुल गांधी का अर्धशतक

आज राहुल गांधी ने उम्र का अर्धशतक पूरा कर लिया, बोले तो आज उनका 50वां बर्थडे है। तो हमने सोचा क्यों न आपको राहुल गांधी की ज़िंदगी से जुड़ी कुछ ख़ास बातें बतायी जाएं। …तो Unbiased India की तरफ से राहुल गांधी को हैप्पी वाला बर्थडे। वैसे भारतीय जवानों पर हमले और कोरोना की वजह से उन्होंने साफ किया है कि वे अपना जन्मदिन नहीं मनाएंगे।

  • 9 जून 1970 को जन्मे राहुल गांधी भारतीय युवा कांग्रेस के अध्यक्ष हैं।
  • स्कूली शिक्षा दिल्ली के मॉडर्न स्कूल से लेने के बाद राहुल गांधी दून स्कूल में पढ़ने चले गए, जहां उनके पिता राजीव ने भी पढ़ाई की थी।
  • साल 1984 में उनकी दादी और तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या और उनके पिता राजीव गांधी के पीएम बनने पर उन्हें वापस दिल्ली बुला लिया गया।
  • सुरक्षा कारणों की वजह से उन्हें 1981 से लेकर 1983 तक की पढ़ाई घर पर ही रहकर करनी पड़ी।
  • साल 1991 में राहुल गांधी के पिता राजीव गांधी की हत्या के बाद उन्हें सुरक्षा घेरे में रखा जाने लगा।
  • उन्होंने हार्वर्ड विश्वविद्यालय के रोलिंस कॉलेज फ्लोरिडा से साल 1994 में कला स्नातक की उपाधि प्राप्त की।
  • 1995 में कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय के ट्रिनिटी कॉलेज से राहुल गांधी ने एमफिल की डिग्री हासिल की।
  • बताया जाता है कि सुरक्षा कारणों से रॉलिस कॉलेज में राहुल गांधी को अपना नाम बदलकर रहना पड़ा। यहां लोग उन्हें राउल विंची के नाम से जानते थे।
  • स्नातक की पढ़ाई के बाद राहुल ने मैनेजमेंट गुरु माइकल पोर्टर की प्रबंधन परामर्श कंपनी मॉनिटर ग्रुप के साथ 3 साल तक काम किया।
  • साल 2002 के आखिर में राहुल गांधी मुंबई में अभियांत्रिकी और प्रौद्योगिकी से संबंधित एक आउटसोर्सिंग कंपनी चलाने के लिए भारत लौट आए।
  • साल 2004 के चुनाव से राहुल गांधी ने सियासी जगत में कदम रखा।
  • राहुल गांधी ने लगातार तीन बार अमेठी सीट से लोकसभा चुनाव जीता।
  • साल 2019 में भाजपा नेता स्मृति ईरानी ने राहुल गांधी को अमेठी सीट से हरा दिया।
  • वर्तमान में राहुल गांधी वायनाड से सांसद हैं।

राहुल गांधी के सामने इस समय सबसे बड़ी चुनौती कांग्रेस के प्राय: खो चुके जनाधार को वापस लाना है। वे लगातार इसके लिए कोशिश भी कर रहे हैं। वो अलग बात है कि उनका सियासी सफर और जिस मंज़िल की तलाश में वे हैं, उसकी डगर चुनौतियों से भरी हुई है। पर आज हैप्पी वाले बर्थडे पर उनकी चुनौतियों की नहीं, सिर्फ उनके बेहतर से बेहतर करने की कामना करते हैं।

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