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अलविदा मिल्खा | ज़िंदगी की रफ्तार थमी हैं, यादों की नहीं – UNBIASED INDIA

अलविदा मिल्खा | ज़िंदगी की रफ्तार थमी हैं, यादों की नहीं

महान भारत के महान धावक 91 साल के मिल्खा सिंह का शुक्रवार को निधन हो गया। वह पिछले दिनों कोरोना संक्रमित हो गए थे, तीन जून को उन्हें चंडीगढ़ के पीजीआईएमईआर की आईसीयू में भर्ती कराया गया था। मिल्खा ने कोरोना को मात दी और 13 जून को वह आईसीयू से बाहर आ गए। कोविड टेस्ट में निगेटिव होने के कुछ दिनों बाद फिर समस्या बढ़ी तो उन्हें चंडीगढ़ के पीजीआईएमईआर में भर्ती कराया गया था। शुक्रवार की शाम उनकी तबीयत बिगड़ गई और काफ़ी कोशिशों के बाद भी उन्हें बचाया नहीं जा सका। रात 11.30 बजे इस महान धावक की ज़िंदगी की रफ्तार थम गई। पांच दिन पहले ही मिल्खा सिंह की पत्नी निर्मल मिल्खा सिंह का निधन भी कोरोना संक्रमण से हो गया था। ज़िंदगी के हमसफर साथ—साथ दूसरी दुनिया को विदा हुए तो कहना तो पड़ेगा अलविदा! मगर, मिल्खा की ज़िंदगी की रफ्तार थमी है, भारतीयों के दिलों में उनकी यादें अब भी मानों धमनियों में रक्त बनकर दौड़ रही हैं।

भारत के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के साथ मिल्खा सिंह

आइए, सबके लिए ख़ास मिल्खा सिंह के बारे में आपको बताते हैं कुछ ख़ास बातें…

मिल्खा सिंह की निजी ज़िदगी | Life of Milkha Singh

युवावस्था में मिल्खा सिंह।
  • मिल्खा सिंह का जन्म 20 नवंबर 1929 को गोविंदपुरा (अभी पाकिस्तान) के एक सिख परिवार में हुआ था।
  • भारत—पाक बंटवारे के दौरान मिल्खा सिंह के माता-पिता की मौत हो गई थी।
  • मिल्खा सिंह भारत विभाजन के बाद पाकिस्तान से भारत लौट आए थे।
  • मिल्खा सिंह को दौड़ने को लेकर जुनून बचपन से ही था। मिल्खा सिंह घर से स्कूल और स्कूल से घर की 10 किलोमीटर की दूरी दौड़कर पूरी करते थे। बाद में मिल्खा पर एथलीट बनने का जुनून इस कदर हावी था कि वे अभ्यास के लिए चलती ट्रेन के साथ दौड़ लगाते थे।
पत्नी निर्मल कौर के साथ मिल्खा सिंह।
  • मिल्खा सिंह ने 1962 में भारतीय महिला वॉलीबॉल टीम की कप्तान रह चुकी निर्मल कौर से विवाह किया था।
  • मिल्खा सिंह की निर्मल कौर से पहली मुलाकात कोलंबो में हुई थी।
  • मिल्खा सिंह के चार बच्चे हैं। इनमें तीन बेटियां और एक बेटा है।
  • मिल्खा सिंह के बेटे जीव मिल्खा सिंह एक नामी गोल्फर हैं।

मिल्खा सिंह की उपलब्धियां | Achievements of Milkha Singh

मिल्खा सिंह
  • मिल्खा सिंह भारत के इकलौते धावक हैं जिन्होंने 400 मीटर की दौड़ में एशियाई खेलों और कॉमनवेल्थ खेलों में भी स्वर्ण पदक जीता था।
  • चार बार कोशिश करने के बाद साल 1951 में मिल्खा सिंह भारतीय सेना में भर्ती हुए थे।
  • 1956 में मेलबर्न में आयोजित हुए ओलंपिक खेलों में मिल्खा सिंह ने पहली बार 200 मीटर और 400 मीटर की रेस में भाग लिया था।
  • मिल्खा सिंह ने 1958 में हुए टोक्यो एशियाई खेलों में 200 मीटर और 400 मीटर की दौड़ में स्वर्ण पदक जीता था।
  • मिल्खा सिंह ने 1962 में हुए जकार्ता एशियाई खेलों में 400 मीटर और चार गुना 400 मीटर रिले दौड़ में भी स्वर्ण पदक अपने नाम किया था।
  • मिल्खा सिंह ने 1958 के कार्डिफ़ कॉमनवेल्थ खेल में 440 गग दौड़ में गोल्ड मेडल हासिल किया था।
मिल्खा सिंह पर बनी फिल्म भाग मिल्खा भाग।
  • 1958 के एशियाई खेलो में सफलता के बाद मिल्खा सिंह को आर्मी में जूनियर कमीशन का पद दिया गया था।
  • मिल्खा सिंह 1960 को रोम ओलंपिक में 400 मीटर दौड़ में कांस्य पदक मामूली अंतर से चूक गए थे। उन्होंने 400 मीटर की दौड़ 45.73 सेकेंड में पूरी की थी, वे जर्मनी के एथलीट कार्ल कूफमैन से सेकेंड के सौवें हिस्से से पिछड़े थे मगर यह टाइमिंग अगले 40 सालों तक राष्ट्रीय कीर्तिमान रहा।
  • मिल्खा सिंह ने पाकिस्तान के तेज धावक अब्दुल खालिक को हराया तब पाकिस्तान के तत्कालीन राष्ट्रपति फील्ड मार्शल अयूब खान ने उन्हें ‘फ्लाइंग सिख’ का नाम दिया। अब्दुल खालिक ने कहा था— ‘आज तुम दौड़े नहीं उड़े हो, इसलिए हम तुम्हें फ्लाइंग सिख का खिताब देते हैं।’
  • खेलों में मिल्खा सिंह अतुलनीय योगदान के लिए भारत सरकार ने उन्हें भारत के चौथे सर्वोच्च सम्मान पद्मश्री से भी सम्मानित किया।
  • मिल्खा सिंह कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत को स्वर्ण पदक जिताने वाले पहले भारतीय हैं।
  • मिल्खा सिंह ने अपनी ज़िंदगी पर एक किताब भी लिखी है— द रेस आफ माइ लाइफ The Race of My Life
  • साल 2013 में मिल्खा सिंह के जीवन पर आधारित फिल्म ‘भाग मिल्खा भाग’ रिलीज हुई।

मिल्खा सिंह के निधन पर शोक का समंदर | Tribute

मिल्खा सिंह के निधन पर पूरा भारत शोक में डूबा हुआ है। देश के राष्ट्रपति—प्रधानमंत्री से लेकर आम लोग तक दुखी हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लिखा है— श्री मिल्खा सिंह जी के निधन से हमने एक महान खिलाड़ी खो दिया है। उनका असंख्य लोगों के दिलों में विशेष स्थान था। उनके प्रेरक व्यक्तित्व ने लाखों लोगों को प्रेरित किया। उनके निधन से आहत हूं…

कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने मिल्खा के लिए लिखा है कि वह सिर्फ एक खिलाड़ी नहीं थे, बल्कि वह भारतीयों के लिए एक प्रेरणा थे।

क्रिकेट की दुनिया के महान खिलाड़ी सचिन तेंदुलकर ने भी अपनी भावभीनी श्रद्धांजलि दी है—

भारतीय सेना ने भी अपने गौरव मिल्खा सिंह को नमन किया है…

प्रसिद्ध फिल्म अभिनेता अमिताभ बच्चन ने भी ट्वीट कर इस महान खिलाड़ी को नमन किया है…

अंत में UNBIASED INDIA की तरफ से देश के महान एथलीट मिल्खा सिंह को विनम्र श्रद्धांजलि! मिल्खा! आप हम भारतीयों को हमेशा याद आएंगे!

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ मिल्खा सिंह।

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