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Happy Birthday दादा | एक ज़िद्दी कप्तान की कहानी – UNBIASED INDIA

Happy Birthday दादा | एक ज़िद्दी कप्तान की कहानी

उन्होंने अपना पहला मैच लॉर्ड्स के मैदान पर खेला और ऐसा खेला कि पहले ही मैच में शतक। कप्तान बने तो ऐसे कि साल 2001 में टीम सलेक्शन के दौरान भज्जी को टीम में लेने के लिए अड़ गए और बोले कि ‘जब तक हरभजन टीम में नहीं आएगा, बाहर नहीं निकलूंगा’। उनकी कप्तानी में भारतीय क्रिकेट टीम आठवें से दूसरे पायदान पर पहुंच गई। ज़िद और जुनूनी कप्तान के तौर पर अपनी पहचान बनाने वाले द गॉड ऑफ द ऑफ साइड, द महाराजा, द वॉरियर प्रिंस सौरभ गांगुली का जन्म बंगाल की धरती पर 8 जुलाई 1972 को हुआ। अब तो आप समझ ही गए होंगे कि आज क्या है, जी हां, आज दादा का हैप्पी वाला बर्थडे है। 

तो आइए दादा की ज़िंदगी के पिच के देखे अनदेखे शॉट्स के बारे में आपको बताते हैं।

  • दादा के करियर से पहले उनकी लव लाइफ के बारे में बताते हैं आपको, जो कि किसी फिल्मी स्टोरी जैसी है। सौरव गांगुली को बचपन से ही अपने पड़ोस में रहने वाली डोना रॉय को काफी पसंद करते थे। बचपन की दोस्ती बड़े होते होते प्यार में बदल गई। सौरव और डोना एक दूसरे से स्कूल के बहाने मिला करते थे। बचपन का ये छोटा सा प्यार बड़े होने पर इश्कियां में बदल गया और फिर दोनों का अलग अलग समुदाय से होना, डोना का डांसर होना और दोनों परिवारों के बीच मनमुटाव इनकी शादी के आड़े आए। जिसके बाद सौरव और डोना ने बंगाल के दिग्गज क्रिकेटर और दोस्त मौली बनर्जी की मदद से रजिस्ट्रार को मौली के ही घर पर बुलाकर कोर्ट मैरिज कर ली। 12 अगस्त 1996 को हुई अपनी शादी के दौरान दादा 23 के थे और डोना सिर्फ 20 की। बाद में जब दोनों के परिवारों को इनकी लुका छिपी वाली शादी के बारे में पता चला तो वे लोग पहले तो काफी नाराज़ हुए लेकिन बाद में मान गए और दोनों की दुबारा शादी करा दी।
  • सौरव और डोना की एक प्यारी सी बेटी है जिसका नाम सना है।
  • अब बात उनके करियर की करते हैं। दादा का पूरा नाम सौरव चंडीदास गांगुली है। उन्हें क्रिकेट का चस्का लगाने वाले उनके बड़े भाई थे। यानी दादा के दादा (बड़े भाई) की वजह से भारतीय क्रिकेट को गांगुली जैसा टाइगर मिला।
  • अपने करियर की शुरुआत में वे स्टेट और स्कूल की टीम में खेला करते थे।
  • रणजी और दिलीप ट्रॉफी के लिए खेलने के दौरान उनका सलेक्शन टीम इंडिया के लिए हुआ और क्रिकेट फैंस को मिला उनका टाइगर प्लेयर। 
  • 1999 क्रिकेट वर्ल्ड कप के दौरान राहुल द्रविण और सौरव गांगुली की जोड़ी ने मिलकर 318 रन की पार्टनरशिप की जो वर्ल्डकप के इतिहास का सबसे बड़ा स्कोर है।
  • साल 2000 में मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर के कप्तानी छोड़ने के बाद दादा को कप्तानी मिली।
  • सौरव गांगुली बीसीसीआई के मौजूदा अध्यक्ष हैं।
  • साल 2002 सौरव गांगुली के साथ ढेर सारे विवाद लेकर आया। नेटवेस्ट सीरीज़ के फाइनल मैच में लॉर्ड्स के मैदान में जैसे ही ज़हीर खान ने अपना विनिंग शॉट लगाया, दादा ने टीशर्ट उतारकर लहराना शुरु कर दिया। जिसके बाद उन्हें काफी आलोचना का सामना करना पड़ा। इस घटना का ज़िक्र उन्होंने अपनी आत्मकथा ‘ए सेंचुरी इज़ नॉट इनफ’ में करते हुए लिखा है कि टीशर्ट उतारकर सेलिब्रेट करना सही नहीं था। जीत का जश्न दूसरे तरीकों से भी मनाया जा सकता था।
  • कोच ग्रेग चैपल से विवाद के कारण भी गांगुली काफी लंबे समय तक सुर्खियों में छाए रहे।
  • गांगुली तीसरे ऐसे बल्लेबाज़ हैं जिन्होंने दस हजार रनों के लैंडमार्क को छुआ है।
  • सौरव गांगुली का नाम सबसे सफलतम कप्तानों में शुमार है।
  • लेफ्ट हैंड बैट्समैन दादा के नाम ग्यारह हजार से ज्यादा रन बनाने का रिकॉर्ड भी दर्ज है।
  •  उनकी कप्तानी में टीम इंडिया ने 49 में से 21 मैच जीते।
  • वन डे मैच में उन्होंने सौ से ज्यादा कैच पकड़े हैं।
  • साल 2003 से उनका प्रदर्शन काफी निराशाजनक रहा, जिसने उनके करोड़ों फैंस को निराश कर दिया।
  • साल 2008 के आईपीएल में सौरव गांगुली ने कोलकाता नाइट राइडर्स की तरफ से बतौर कप्तान अच्छी पारी खेली।
  • साल 2008 में दादा ने अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट से अपने रिटायरमेंट की घोषणा कर दी।
  • 2004 में सौरव गांगुली को पद्मश्री से सम्मानित किया गया।
  • पश्चिम बंगाल सरकार ने उन्हें बंगा विभूषण अवॉर्ड से नवाज़ा।

सौरव चंडीदास गांगुली ने अपने खेल, अपने अंदाज़ और जज्बे के दम पर अपनी अलग पहचान बनाई है। उनकी लव स्टोरी हो या क्रिकेट के पिच पर अपनी पहचान बनाने का, कप्तानी करने का तरीका हो, सब बेहद शानदार रहा है। तभी तो दादा को महाराजा भी कहकर बुलाते हैं। कुछ हासिल करने के लिए कुछ भी कर गुज़रने की हिम्मत हो तो कैसे सब कुछ हासिल हो जाता है, यही बताती है दादा की अब तक की कहानी।

इस कहानी के लिए थैंक्यू दादा और टीम Unbiased India की तरफ से Happy wala B’day.  

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