<> Untold Story of शोमैन | UNBIASED INDIA >

Untold Story of शोमैन

कल खेल में, हम हों न हों
गर्दिश में तारे रहेंगे सदा
भूलोगे तुम, भूलेंगे वो
पर हम तुम्हारे रहेंगे सदा
होंगे यहीं अपने निशां… इसके सिवा जाने कहां…

वाकई, उन्होंने ठीक कहा था, उनके निशां हमेशा हमेशा के लिए यहां हैं। वैसे भी कलाकार मरते नहीं, अमर हो जाते हैं। तो आज बॉलीवुड के शोमैन राजकपूर साहब की जयंती के मौके पर उनकी ज़िंदगी से जुड़ी कुछ ख़ास बातें आपसे शेयर करते हैं। मन करे तो राजकपूर साहब की फिल्म का अपनी पसंद का कोई गाना सुनते हुए पढ़िए।

  • •राजकपूर का असली नाम रणबीर राज पृथ्वीराज कपूर था।
  • • राजकपूर दस साल की उम्र में पहली बार 1935 में आई फिल्म इंकलाब में नज़र आए। इसके बाद 23 साल की उम्र में वे नीलकमल फिल्म में नज़र आए जिसकी कामयाबी के बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा।
  • • 1948 में राजकपूर साहब ने जब अपना स्टूडियो आरके फिल्म्स खोला तब वे मात्र 24 साल के थे। आर के फिल्म्स के बैनर तले बनी पहली फिल्म थी ‘आग’, जिसमें नरगिस दत्त और राजकपूर की जोड़ी के साथ साथ फिल्म भी सुपरहिट रही।
  • • 1950 में आई फिल्म बरसात में राजकपूर ने पहली बार बतौर निर्माता, निर्देशक और अभिनेता के तौर पर काम किया। इस फिल्म के शूट के दौरान वो और नरगिस दत्त एक दूसरे के करीब आए। लेकिन राजकपूर अपने पिता के खिलाफ जाकर नरगिस से शादी नहीं कर पाए जिसके बाद नरगिस ने सुनील दत्त से शादी कर ली।
  • • राजकपूर चार्ली चैपलिन के बहुत बड़े फैन थे और अपनी कुछ फिल्मों में उन्होंने कुछ सीन्स में उन्हें कॉपी भी किया।
  • • दिलीप कुमार और राजकपूर की नज़दीकियां इतनी गहरी थीं कि दिलीप साहब की शादी में राजकपूर अपने पिता और देवानंद के साथ बारात में सबसे आगे थे।
  • • फिल्म बॉबी का एक सीन जिसमें ऋषि कपूर, डिंपल से उनके घर पर मिलते हैं, असल ज़िंदगी में नरगिस दत्त और राजकपूर साहब की पहली मुलाकात वैसी ही थी। मतलब राजकपूर ने अपनी रीयल ज़िंदगी के एक ख़ास लम्हे को रील लाइफ में उतारा।
  • • राजकपूर की फिल्म ‘मेरा नाम जोकर’ पहली ऐसी फिल्म है जिसमें दो इंटरवल थे क्योंकि ये फिल्म साढ़े चार घंटे की है।
  • • अपने पचास साल से ज्यादा के करियर में राजकपूर ने बतौर अभिनेता, निर्देशक दो सौ से ज्यादा फिल्मों में काम किया है।
  • • राजकपूर को उनके शानदार फिल्मी करियर के लिए 3 राष्ट्रीय पुरस्कार, 11 फिल्मफेयर, पद्मभूषण के साथ साथ दादा साहेब फाल्के पुरस्कार से भी नवाज़ा गया।
  • • राजकपूर की फिल्मों में अक्सर उनके गीत मुकेश और मन्ना डे ही गाया करते थे। जब गायक मुकेश का निधन हुआ तब राजकपूर ने कहा था, ‘मैंने अपनी आवाज़ को खो दिया।’
  • • राजकपूर का नाम अफ्रीका, मिडल ईस्ट, चीन, टर्की, दक्षिणपूर्व एशिया और प्राचीन सोवियत यूनियन में बेहद प्रसिद्ध है।
  • • 1988 में राजकपूर साहब फिल्म ‘हिना’ बना रहे थे, वहीं दूसरी तरफ उन्हें अस्थमा की वजह से सांस लेने में तकलीफ होने लगी जिसके बाद 2 जून 1988 को उन्होंने दुनिया को अलविदा कह दिया लेकिन अपने किरदारों और फिल्मों के ज़रिए हमेशा हमेशा के लिए हमारे बीच रह गए।
Share this Article
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!