जानिए हरियाणा का रामकृष्ण यादव कैसे बना योग गुरु रामदेव

योग गुरु बाबा रामदेव किसी परिचय के मोहताज नहीं। देश से लेकर विदेश तक अपनी पहचान बना चुके बाबा रामदेव को विवाद भी बखूबी पहचानते हैं। हाल ही में कोरोना के इलाज को लेकर बाबा की बनायी दवा कोरोनिल को लेकर ख़ासा विवाद हुआ। पर अंत भला तो सब भला की तर्ज पर सशर्त कोरोनिल बेचने की परमिशन तो बाबा मिल गई। इसी बात पर हमने सोचा क्यों न आज बाबा रामदेव के जाने अनजाने सफर पर आपको ले चलें। तो आगे पढ़िए कैसे हरियाणा का रामकृष्ण यादव कैसे बना योग गुरु बाबा रामदेव।
  • 26 दिसंबर 1965 को हरियाणा के महेंद्रगढ़ के एक छोटे से गांव में अलीपुर में जन्म हुआ रामकृष्ण यादव का। उनके पिता का नाम रामनिवास यादव और मां का गुलाबो देवी था।
  • 8वीं तक की पढ़ाई के बाद उन्होंने अलग अलग गुरुकुल से योग, धर्मग्रंथ और संस्कृत की शिक्षा ली।
  • इसी दौरान उन्होंने संन्यास ग्रहण किया और बाबा रामदेव बन गए।
  • •बचपन में ही उन्हें पैरालिसिस का अटैक पड़ा, लेकिन आत्मविश्वास और योग के दम पर उन्होंने अपने आप को ठीक किया और मुख्य धारा से जोड़ा और लोगों को मुफ्त में योग प्रशिक्षण देना शुरु किया।
  • इसके बाद हरियाणा से निकलकर बाबा रामदेव पहुंचे उत्तराखंड के हरिद्वार और गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय में उन्होंने योग और धार्मिक ग्रंथों को पढ़ा।
  • साल 1995 में बाबा रामदेव ने दिव्य योग मंदिर ट्रस्ट की स्थापना की और यहां से उनके जीवन में प्रसिद्धि के सफर की शुरुआत हुई।
  • बाबा रामदेव ने योग शिविर आयोजित किए जिसमें आम जनता के साथ साथ देश विदेश की नामचीन हस्तियों ने भी हिस्सा लिया। यहां से वे योग गुरु बाबा रामदेव के रुप में पहचाने जाने लगे। योग को एक नया आयाम देने का श्रेय बाबा रामदेव को ही जाता है।
  • बाबा रामदेव का पतंजलि योगपीठ भारत के साथ साथ विदेशों में भी अपनी पहचान रखता है।
  • पहली बार सार्वजनिक तौर पर देवबंद के मुस्लिम धर्मगुरुओं को भी बाबा रामदेव ने योग की शिक्षा दी।
  • साल 2011 में बाबा रामदेव भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन और जनलोकपाल को लेकर चले आंदोलन से भी जुड़े।
  • बाबा रामदेव की ज़िंदगी में 27 फरवरी 2011 की तारीख भी बेहद अहम है। इस दिन दिल्ली के रामलीला मैदान में भ्रष्टाचार के खिलाफ उन्होंने रैली की, जिसमें अन्ना हजारे, अरविंद केजरीवाल, किरण बेदी, स्वामी अग्निवेश जैसी हस्तियां भी शामिल हुईं। इस रैली के बाद बाबा रामदेव पर ये भी आरोप लगा कि वे सियासत में कदम रखना चाहते हैं, पर बाबा ने इस बात को सिरे से नकार दिया।
  • काले धन को भारत वापस लाने की मांग को लेकर 4 जून, 2011 को दिल्ली के रामलीला ग्राउंड में अनशन पर बैठ गए। जिसके बाद सरकार ने काला धन वापस लाने के लिए एक समिति बना दी। लेकिन बाद में रैली को खत्म कराने के लिए सरकार की तरफ से कार्रवाई की गई, जिसमें बहुत सारे लोग घायल हुए, एक महिला की मौत हुई और बाबा रामदेव खुद को बचाने के लिए सलवार कुर्ते में वहां से छिपकर निकले।
  • बाबा रामदेव के सहयोगी आचार्य बालकृष्ण पर भी उनकी नागरिकता को लेकर सवाल उठते रहे हैं। उनके खिलाफ फर्जी पासपोर्ट, नेपाल से भाग कर आने और आर्म्स एक्ट के तहत भी मामला दर्ज कराया गया।
  • हरिद्वार में आश्रम के पास की ज़मीन पर अवैध कब्जे के आरोप भी लगे।
  • एक बार बाबा रामदेव पर कर चोरी और उनके बनाए उत्पादो में कथित तौर पर पशुओं की हड्डियां पाए जाने का आरोप लगा। जिसके बाद अमेरिका में उनके उत्पादों को प्रतिबंधित कर दिया गया था।
  • बाबा रामदेव पर आरएसएस और बीजेपी के शह पर अनशन और रैलियां करने का भी आरोप लगा। लेकिन उन्होंने हर बार इस तरह के आरोपों का सटीक जवाब दिया और साफ किया कि वे सिर्फ योग और स्वदेशी उत्पादों के ज़रिए जनता के बीच रहना चाहते हैं, उनका सियासत से कोई लेना देना नहीं।
  • कई बड़े शिक्षण संस्थान बाबा रामदेव को मानद डॉक्टरेट की उपाधि से भी नवाज़ चुके हैं।
  • अब तक बाबा रामदेव को कई पुरस्कारों से सम्मानित किया जा चुका है।
  • साल 2019 में बाबा रामदेव की आत्मकथा ‘My Life My Mission’ भी प्रकाशित हुई, जिसे उन्होंने वरिष्ठ पत्रकार उदय माहुरकर के साथ मिलकर लिखा। इस किताब में उनकी ज़िंदगी से जुड़ी हर छोटी बड़ी बात और संघर्ष का ज़िक्र है।
कुल मिलाकर बाबा रामदेव एक ऐसे सफर पर हैं जहां सफलता के साथ संघर्ष और विवाद से भी उनकी मुलाकातों के सिलसिले चलते रहते हैं, लेकिन इन सबसे अलग सबसे बड़ा सच ये है कि देश और दुनिया में योग को एक बार फिर से पहचान दिलाने में उनकी भूमिका हमेशा ख़ास रहेगी।
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