Happy Dussehra | आइए इन दस बुराइयों का दहन करें

आप सभी को आपकी इस सखी श्वेता और दोस्त UNBIASED INDIA की तरफ से रामनवमी और दशहरा की हार्दिक शुभकामनाएं!

कुनकुनी ठंड ने दस्तक दे दी है। अक्टूबर जाने को है और नवंबर आने को है। कुछ महीनों में साल भी बदल जाएगा, लेकिन 2020 ने कोरोना काल बनकर जिस तरह हम सभी की ज़िंदगियों पर असर डाला है, उसने काफी कुछ बदल दिया है। किसने सोचा था कि ऐसा भी कोई वक्त आएगा जब हम रामलीला भी सोशल मीडिया पर देखेंगे या दशहरा भी वर्चुअली मनाएंगे। खैर, अक्सर ऐसी बहुत सी चीज़ें होती हैं जहां तक हमारी सोच पहुंचती ही नहीं है। लेकिन, आज के इस मौके पर अपने अंदर की बुराइयों को खत्म करने की परंपरा जारी रहनी चाहिए।

… तो आइए इस दशहरे दस बुराइयों का दहन करते हैं या दस अच्छी आदतें अपनाते हैं

1. पौधरोपण से जी न चुराएं। अपने आस पास ज्यादा से ज्यादा पौधे लगाएं, ताकि जिस तरह 2020 कोरोना काल बना उस तरह अक्टूबर—नवंबर के नाम के साथ माह—ए—Pollution जुड़ना बंद हो।

2. उन situations की एक लिस्ट बनाइए जिन्हें याद करने के बाद आप आइने के सामने खड़े होकर खुद से नज़रें नहीं मिला सकते। मतलब वो पल जब आपने किसी को जाने—अनजाने तकलीफ पहुंचाई हो। किसी को धोखा दिया हो। वादा कीजिए खुद से कि ख़ुद पर भूल से भी किसी तरह के छल कपट को हावी नहीं होने देंगे।

3. आपके आस—पास बहुत से ऐसे लोग होंगे, जिन्हें आपके साथ की ज़रुरत होगी,कोशिश कीजिए कि जितना मुमकिन हो, उतना आप उनका साथ दे पाएं। पर हां, साथ नहीं दे सकते तो किसी को झूठी उम्मीद भी मत दीजिए। क्योंकि उम्मीदों का टूटना कई बार इंसान को काफी अंदर तक तोड़ देता है।

4. दिन के 24 घंटे में आप Me Time यानी खुद के लिए टाइम ज़रुर निकालेंगे। नौकरी और घर की ज़िम्मेदारियों के बीच खुद को चक्की बनाने से बेहतर है कि थोड़ा सा ही सही, खुद के लिए वक्त निकालिए। अपनी पसंद की किताबें पढ़िए, गाने सुनिए, सेहत और चेहरे का ध्यान रखिए और अपनी पसंद का कुछ पकाइए या नहीं, पर खाइए ज़रुर।

5. अगर अपने परिवार से दूर हैं तो उनसे फोन पर ज़रुर बात कीजिए। अक्सर बहुत सारे लोगों को देखती हूं जो पूरा हफ्ता या फिर कई बार कई महीने बिना अपने पैरेंट्स से बात किए, बिता देते हैं। अपने दोस्तों और काम के लिए भी तो आप वक्त निकालते हैं न, तो फिर पैरेंट्स और फैमिली के लिए क्यों नहीं।

6. अपने हेल्थ को कभी ignore मत कीजिए। सेहत से जुड़ी किसी भी समस्या को फिकर नॉट कहकर मत टालिए, क्योंकि जान है तो जहान है।

7. लोगों को माफ करना सीखिए। अक्सर बेहद करीबी ही बेहद गहरी चोट दे जाते हैं। ऐसे में अगर सामने वाला अपनी गलती realize करता है और आपसे माफी मांगता है तो माफ कर दिजिए। अच्छा महसूस होगा।

8. जब भी आपको बहुत गुस्सा आए तो कोशिश करके शांत रहिए। क्योंकि जब हमारा गुस्सा peak पर होता है तब हमें समझ नहीं आता कि हम क्या और क्यों बोल रहे हैं। इसलिए बेहतर यही है कि थोड़ी देर के लिए शांत रहा जाए। बाद में पछताने से तो बेहतर है न चुप्पी।

9. कभी भी किसी से खुद की या अपनों की तुलना मत कीजिए। दुनिया की आधी समस्या की जड़ ही ये सोच है कि ‘उसकी शर्ट मेरी शर्ट से सफेद कैसे’। खुद को निकालिए इससे। ये मानकर चलिए कि हर इंसान खुद में Perfect है और सबसे अलग भी।

10. अगर आपके आस पास कोई इंसान अवसाद यानी Depression से जूझ रहा है, उदासियों के सायों से घिरा हुआ है तो उसकी मदद कीजिए। उसके हालात को समझने की कोशिश कीजिए।

… और आखिर में दशहरे के इस मौके पर अपने अंदर की कमियों को पहचानने की कोशिश कीजिए, उन्हें दूर करने की कोशिश का खुद से वादा कीजिए।

ज़िंदगी में कोई भी राह चुनने से पहले अगर उसके होने वाले असर के बारे में पहले से सोच लिया जाए तो कई परेशानियों से बचा जा सकता है। अगर रावण ने सोचा होता कि सीता हरण का परिणाम ये भी हो सकता है तो शायद सीताहरण जैसा कृत्य करने का उसने सोचा भी न होता। तो कुछ भी करने से पहले सोचिए और तब आगे बढ़िए।
आप सभी को Happy and Healthy दशहरा! #UNBIASED_india पर पढ़ते रहिए संडे विद श्वेता 

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