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हैप्पी बर्थडे… चन्नर काका

प्रेमचंद की जयंती पर विशेष कथा सम्राट प्रेमचंद का नाम कौन नहीं जानता? आज उनकी जयंती है। 31 जुलाई 1880 को वाराणसी के लमही में जन्मे प्रेमचंद का 8 अक्टूबर 1936 को निधन हो गया था। आज प्रेमचंद की जयंती पर गोरखपुर की अर्पण दूबे ने उन्हें चन्नर काका के रूप में संबोधित करते हुए

सरगोशी

Dear पापा… हर दिन इज ‘तोहार’

आकृति विज्ञा ‘अर्पण’ कहाँ से शुरू करें और कहां खत्म करें, ये सोचना भी मेरे बस का नहीं, लेकिन मनबढ़ तो हूँ। अब आप कर भी का सकते हैं, काहें कि ये वाली मनबढ़ई मुझे अपने हक़ की बात लगती है। पापा जी,आपके पापा अर्थात् हमरे पिताजी (दादा जी), मम्मी के पापा मने हमरे नाना

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कब्र पर कहानियां

खेतों की कब्रों पर लिखी गयी एकांत कहानियां, जहाँ पर आकाश का सूनापन मन के खाली गमलों को धीरे—धीरे अपने जब्त में ले रहा हो, ठीक उसी तरह जिस तरह मैं महसूस कर पा रही हूँ अपनी मासूमियत के कब्र पर बनी अनुभूति की कड़वी परत जो आहिस्ता—आहिस्ता दरकची बातों को वक्त के पालिश से

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