जबरिया इश्क़

इश्क़ पर ज़ोर नहीं, है यह वो आतिश ग़ालिबजो लगाए न लगे और बुझाए न बुझे।…

रिश्ता है पर अहसास नहीं? कभी सोचा है क्यों?

कहने को सब ही हैं ख़ास,फिर क्यों नहीं है कोई पास ?गर सभी अपने हैं,फिर क्यों…

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