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पीपल और गुलमोहरी का मौन प्रेम

आरी कुल्हाड़ी झेलती हुई गुलमोहरी का अस्तित्व आज नष्ट ही होने वाला था कि उसने पीपल से कहा सुनो ..मैं भी तुमसे प्रेम करती हूं। मेरे रंगीन रूप ने तुम्हें समझने में हमेशा अवरोध उत्पन्न किया। मैं अपनी मुग्ध मनोरमता के कारण तुम्हें पहचान न सकी। आज इतनी आसानी से टूटने पर मुझे एहसास हो

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