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रोटी सबसे बड़ी

मेरे भी कई ख्वाब थे,उन ख्वाबों मेंगगन को छू लेने जैसे अहसास थे पर,हकीकत की दुनिया बड़ी कठिन थीये भूख भी बड़ी जालिम निकलीवो रोटी जो सामने थी खड़ीकलम की ज़रूरत से थी बड़ी रोटी की खोज लेकर जहां जाती हैउम्र बहुत बड़ी हो जाती हैअक्सर रोटी की तलाश मेंप्रतिभाएं गुम हो जाती हैं ना

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