प्रेम कुमार सिंह
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने अंदाज में चीन को सख्त चेतावनी दे डाली है। लद्दाख में भारत-चीन झड़प पर बात करते हुए उन्होंने मन की बात में साफ कहा कि भारत की भूमि पर आंख उठाकर देखने वालों को करारा जवाब मिला। भारत, मित्रता निभाना जानता है तो आंख में आंख डालकर देखना और उचित जवाब देना भी जानता है…।

धाकड़ नेतृत्व
बड़े हर्ष का विषय है कि आज अपना देश प्रधानमंत्री मोदी जैसे धाकड़ नेता के नेतृत्व में आगे बढ़ रहा है। हमारे यहां धाकड़ के कई अर्थ हैं। जैसे— जिसकी धाक या दबदबा चारों ओर हो, जिसकी ख्याति हो, जो हृष्ट-पुष्ट, तगड़ा, बलवान हो। धाकड़ शब्द बड़ा अनमोल है। इसको धारण करने वाले या इससे विभूषित होने वाले बहुत गिने—चुने लोग होते हैं।

धाकड़ का अर्थ
धाकड़ का एक अर्थ बैल भी है। इससे धाकड़ का भावार्थ समझने में मदद मिलेगी। आज से 50 साल पहले देश में बैलगाड़ियों से सामान की ढुलाई होती थी। प्रत्येक किसान के घर बैलगाड़ी होती थी। उस समय पक्की सड़कें नहीं थीं। इसलिए बैलगाड़ी को खींचने के लिए तीन बैल लगाए जाते थे। दो पल्ले पर और तीसरा बिड़िहा होता था। यह बिड़िहा हर परिवार में होता था पर कई गांवों में किसी एक—दो परिवार का बिड़िहा ही धाकड़ का रुतबा हासिल करता था। बैलगाड़ी में जुतने के बाद वह इतना समर्पित हो जाता था कि यदि गाड़ी के कहीं फंसने की नौबत आ जाए तो वह घुटने के बल जोर लगाने लगता था। यह धाकड़ किसी की बैलगाड़ी कहीं फंसी हो तो निःस्वार्थ जाकर निकालता था। यह धाकड़ घर के गाय का बछवा होता था और परिवार इसे बिड़िहा बनाने के लिए बचपन से खान—पान का ध्यान रखता था और मन सरहंग भी बनाता था। वह चाहे कुछ करे, दूसरे पशुओं को मार दे पर उसे मार नहीं पड़ती थी। मरकहा हो जाने पर उसे दो रस्सियों से दो तरफ बांधते थे पर उसके ऊपर कभी कोई डंडा नहीं चलाता था क्योंकि वह धाकड़ अपने मालिक के परिवार की शान हुआ करता था।

धाकड़ की पहचान
धाकड़ का भावार्थ तो आपने समझ ही लिया होगा। ये धाकड़ पहले बहुतायत में पाए जाते थे पर अब खोजने पर एकाध मिलते हैं। देश सौभाग्यशाली है कि इसका नेतृत्व एक धाकड़ कर रहा है।
धाकड़ की विशेषता है कि हम जुल्म करेंगे नहीं पर तुम जुल्म करोगे तो हम सहेंगे नहीं। हम दोस्त बनाते हैं। दोस्ती निभाते हैं पर दोस्त, दोस्त बनकर दगा करे तो हम उसे भी अपने देश के आन—बान और शान के लिए सर्जिकल स्ट्राइक करके मजा चखाते हैं। धाकड़ के आगे दाल किसी की नहीं गलती, चाहे वह चीन ही क्यों न हो। धाकड़ जब अपनी भृकुटी टेढ़ी करता है तो चीन की सेना दो किलोमीटर पीछे सरक लेती है। सिर्फ कोई धाकड़ ही कह सकता है भारत मित्रता निभाना जानता है, तो आंख में आंख डालकर देखना और उचित जवाब देना भी जानता है…।
ऐसे धाकड़ प्रधानमंत्री को सैल्यूट।

(प्रेम कुमार सिंह उत्तर प्रदेश के सेवानिवृत्त अभियंता हैं और एक स्वतंत्र ब्लॉगर। वह विभिन्न मुद्दों पर अपने ब्लॉग Thoughts Unfiltered में अपनी बेबाक राय रखते हैं। पीके सिंह ने यह लेख Unbiased India के साथ साझा किया है।)

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