अजीब सी चाहत है मेरी…

सृजन
✍️ अंजली

बड़ी अजीब चाहत है मेरी,
जहाँ नहीं होता कुछ भी
मैं वहीँ सबकुछ पाना चाहती हूँ,

वहीं पाना चाहती हूँ
मैं अपने सवालो के जवाब
जहाँ लोग बर्षो से चुप हैं,

चुप हैं कि
उन्हें बोलने नहीं दिया गया
चुप हैं कि
क्या होगा बोलकर
चुप हैं कि
वे चुप्पीवादी हैं,

मैं उन्ही आंखों में
अपने को खोजती हूं
जिनमें कोई भी आकृति
नहीं उभरती,

मैं उन्हीं आवाजों में
चाहती हूं अपना नाम
जिनमें नहीं रखता मायने
नामों का होना ना होना,

मैं उन्हीं का साथ चाहती हूँ
जो भूल जाते हैं
मिलने के ठीक बाद,
मैं वहीं सब कुछ पाना चाहती हूँ!

(युवा कवयित्री अंजली काव्य—मंचों पर सक्रिय रहती हैं। उन्होंने अपनी यह रचना UNBIASED INDIA के साथ साझा की है।)

Facebook Comments Box
Ajib si chahat Poetry Poetry of Anjali Shayara Anjal Shayara Anjali Unbiased Blog Unbiased Poetry Unbiased poetry corner Unbiased Shayari अंजली अजीब सी चाहत अन्बॉयस्ड ब्लॉग कविता गजल शायरी

2 thoughts on “अजीब सी चाहत है मेरी…

  1. शब्दों के बांध से भावनाओं को छोड़ देती हैं और वो सैलाब सबको डूबा लेे जाता है ।

Leave a Reply

Your email address will not be published.

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

Related Posts

सृजन

Daughter’s Day | बेटियां

माधुरी सिंह

चिड़ियों की झुंड सीचहचहाती हैं बेटियां,पगडंडियों पर नीले—पीले आंचल उड़ाती हैं बेटियां!आंगन की तुलसी बन घर को महकाती हैं बे​टियां,हंसी—ठिठोली कर सबका मन बहलाती

सृजन

इश्क़ और बारिश…

✍️ मन्नत

इश्क का नशा औरबारिश की एक बूंद,दोनों एक से है।प्यार में बावरा मन औरठंडी हवाओं में झूमता वृक्ष,दोनों एक से हैं।आंखों में बसे मोहब्बत

error: Content is protected !!