ज़िंदगी | NO MORE डरना—वरना…

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फिल्म Mary Kom का एक डायलॉग है कि ‘किसी को इतना भी मत डराओ कि डर ही खत्म हो जाए’। बात तो सही है, फिर आखिर क्यों ये डर हमारे अंदर से खत्म नहीं होता? हम रात के अंधेरे से डरते हैं जबकि हम जानते हैं कि हर रात की सुबह ज़रुर होती है। हम जानते हैं कि इस अंधेरे को मिटाने के लिए एक छोटा सा दीया ही काफी होगा। जानते तो हम ये भी हैं न कि कुछ भी स्थायी नहीं है, फिर क्या हो जाता है हमें, आखिर क्यों डर हम पर इस कदर हावी होता है कि हम ज़िंदगी से ही डरने लगते हैं।

आप सोच रहे होंगे कि आज मुझे क्या हो गया है? मुझे कुछ नहीं हुआ पर न जाने हमारे आस—पास के लोगों को क्या हो गया है! बहुत से लोग ऐसे हैं जो डरे हुए हैं, घबराए हुए हैं, जो बाहर से हंसते, खिलखिलाते, मुसकुराते नज़र आते हैं, फिर अचानक आ जाती है ख़बर कि वे ज़िंदगी से हार गए। लोग सोचते रह जाते हैं कि आखिर क्या हुआ, आखिर क्यों हुआ ऐसा।

अभी एक ख़बर आई कि NEET की परीक्षा देने से पहले ही एक छात्र फेल होने से ऐसा डरा कि उसने मौत को गले लगा लिया। हाल ही में एक महिला की तस्वीर वायरल हुई जिसमें उसने फांसी लगाई हुई है और वहीं एक मासूम सी बच्ची बैठी हुई है। एक और ख़बर आई कि बारह साल की एक बच्ची ने सुसाइड कर लिया क्योंकि उसे लगा कि वो प्यार में हार गई है। ऐसी जानें कितनी ज़िंदगियां हैं जो ख़बर बन जाती हैं इसलिए नहीं कि उन्होंने संघर्ष से लड़ाई जीत ली, बल्कि इसलिए कि वे बिना लड़े ही हार मान बैठे।

ये तो चंद घटनाएं हैं जो जवाब मांग रही हैं उस सवाल का जिसे किसी ने पूछा ही नहीं। कोई देख ही नहीं पाता उस डर को जो हम सभी के अंदर छिप कर बैठा रहता है। किसी को rejection का डर है तो किसी को फेल हो जाने का, कोई इस बात से डर है कि कहीं मेरा साथी साथ न छोड़ दे, तो कोई इस बात से परेशान कि अगर कल को नौकरी न रही तो? किसी को बैंक लोन न भर पाने का डर है तो किसी को इस बात का डर कि अगर अपनों ने साथ छोड़ दिया तो? जाने ऐसे कितने सवाल हैं जिन्होंने हम सभी को डराया हुआ है, पर अब हमें इस डर को डराना ही नहीं, खुद से भगा भी देना है।

जब भी डर लगे, मन घबराए तो कुछ ख़ास टिप्स हैं जिन्हें फॉलो कीजिए।

• किसी ऐसे इंसान से बात कीजिए जो आपकी बात को समझता हो। उसे बताइए कि आप खुद को हताश और डरा हुआ महसूस कर रहे हैं।
• किसी भी पेज पर लिखिए कि आपके होने न होने से क्या, किस पर और कितना फर्क पड़ेगा।
• सोचिए, अपने उस लक्ष्य के बारे में जिसे पूरा करने के बाद आप खुद पर गर्व महसूस करेंगे।
• म्यूजिक सुनिए क्योंकि संगीत में healing की अद्भुत शक्ति है।
• कुछ अपनी पसंद का खाइए, चॉकलेट भी ट्राइ कर सकते हैं।
• खुद को looser मानने से पहले उन लोगों के बारे में ज़रुर सोचिए जिन्होंने शारीरिक अक्षमता को हराकर ज़िंदगी में कुछ हासिल किया है।
• रोज़ किसी अचीवर (achiever) की कहानी ज़रुर पढ़िए। आप अपने आस पास के कामयाब लोगों के संघर्ष को जब जान लेंगे तो समझ पाएंगे कि कोई भी परेशानी हमें डराने के लिए नहीं बल्कि कामयाबी के मज़े को दुगुना करने के लिए आती है।
• अपने पैरेंट्स के साथ, भाई बहनों के साथ वक्त ज़रुर बिताइए। अगर वो दूर हैं तो कोशिश कीजिए की रोज़ बात करें। इससे आपका मन हमेशा इस अहसास के साथ रहेगा कि आपके अपने आपके पास हैं।
• रोज़ थोड़ा सा वक्त अपनी सेहत को दिजिए, क्योंकि ये fact है कि exercise करने से न सिर्फ हम physically बल्कि mentally भी strong होते हैं।
• आपको बात बात पर आपकी कमियों का अहसास कराने वाले लोगों से दूरी बनाकर रखिए, ऐसे लोग आपके अंदर negativity को भरते हैं, जबकि दुनिया का एक सबसे बड़ा सच ये है कि कोई भी पूरी तरह से परफैक्ट नहीं होता। तो फिर हम क्यों परफैक्शन के चक्कर में frustration के शिकार हों।
• मन को हारने मत दिजिए। रात के बाद सुबह का आना तय है,ठीक इसी तरह अगर आप फेल भी होते हैं, तो भी अगली बार ज़रुर पास होंगे, ये मानकर चलिए।

ज़िंदगी बहुत कीमती है, ये हमें बहुत कुछ देती है,और बदले में बस इतना चाहती है कि शीशे में जिस शख्स का चेहरा दिख रहा है, वो हमेशा ज़िंदादिली के साथ रहे, खुश रहे, खिलखिलाता रहे। अपनी ज़िंदगी के लिए इतना तो आप कर ही सकते हैं न? मुसकुराते हुए कहिए कि हां, हम करेंगे, अपने लिए, अपनी ज़िंदगी के लिए और अब कभी किसी भी बात के डर खुद पर हावी नहीं होने देंगे।

तो संडे को फीयर—डे नहीं, बल्कि फन—डे बनाइए। … और हर संडे कुछ खास पढ़ना हो तो UNBIASED INDIA पर पढ़ना न भूलिए SUNDAY WITH SHWETA.

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