UNBIASED india | हिंदी

सच से सरोकार

सुशांत, तुमने एक बार कहा तो होता

 सुशांत, तुमने एक बार कहा तो होता
सुशांत! 

काई पो चे मूवी हो या छिछोरे हर फिल्म में तुमने सिखाया हार मत मानना। फिर तुमने कैसे हार मान ली सुशांत? जिस कामयाबी के लिए लोग तरसते हैं वो तुम्हें हासिल थी। लोगों के जिस प्यार के लिए सितारे तरसते हैं, वो भी तुम्हें हासिल था। फिर क्यों किया तुमने ये सब?

डीयर सुशांत,
मुझे नहीं मालूम कि तुम्हें क्या परेशानी थी। लेकिन, तुम छह महीने से डिप्रेशन में थे तो किसी से कुछ कहा क्यों नहीं? वो दोस्त जो तुम्हारे घर पर पार्टी कर रहे थे, उन्हीं से कह देते एक बार कि मन इस तरह टूट रहा है कि तुम खुद को खत्म कर लोगे। एक बार तो कहा होता कि तुम्हें जीने से ज्यादा आसान मौत को गले लगाना लग रहा है। एक बार तो कहा होता सुशांत, एक बार तो कहा होता।

लाखों करोड़ों दिलों का चहेता सितारा सुशांत मात्र 34 साल की उम्र में दुनिया को इस तरह अलविदा कह देगा, विश्वास नही होता। आज हर ज़ुबां पर एक ही सवाल है आखिर क्यों, और उनसे जुड़ा हर शख्स यही सोच रहा है कि एक बार तो कहा होता। पर न तो सुशांत ने कुछ कहा और न ही उनके साथ के लोग उनके अंदर की टूटन को देख पाए और इस तरह बॉलीवुड का एक चमकता सितारा ख़ामोशी के साथ दूसरी दुनिया में चला गया।

सुशांत की फिल्म का एक डायलॉग है ‘मेरा ऑफिस बड़ा नहीं है पर मेरे सपने बहुत बड़े हैं’ वाकई उनके सपने बहुत बड़े थे। तभी तो छोटे परदे को छोड़ बड़े परदे पर एक के बाद एक हिट फिल्में दे रहे थे सुशांत।

आइए, सुशांत के करियर पर नज़र डालते हैं…

• साल 2008 में पहली बार टीवी सीरीयल किस देश में है मेरे दिल में दिखे।
• साल 2009 पवित्र रिश्ता में बतौर मानव का किरदार निभाते नज़र आए और अपनी पहचान बनाने में कामयाब रहे।
• 2010 में ज़रा नच के दिखा सीज़न 2 में बतौर प्रतिभागी नज़र आए।
• साल 2010 -11 में झलक दिखला जा सीज़न 4 की ट्रॉफी बतौर प्रतिभागी सुशांत ने अपने नाम की।
• सुशांत ने कई टीवी कमर्शियल में भी काम किया।
वहीं बड़े परदे पर सुशांत की हिट फिल्मों का सिलसिला शुरु हुआ –
• 2013 काय पो छे से
• 2013 शुद्ध देसी रोमांस
• 2014 पीके
• 2015 डिटेक्टिव ब्योमकेश बक्शी
• 2016 एम एस धोनी- द अनटोल्ड स्टोरी
• 2017 रबता
• 2018 चंदा मामा दूर के
• 2018 केदारनाथ
• 2019 छिछोरे।

अफसोस है…
2019 में रिलीज छिछोरे में तो सुशांत ज़िंदगी जीने का जज्बा सिखाते नज़र आए थे। उनके एक एक डायलॉग पर तालियों की गड़गड़ाहट से मल्टिप्लेक्स गूंज उठे थे। पर अपने पीछे एक गहरी ख़ामोशी छोड़ गए सुशांत। किसी को समझ नहीं आ रहा कि क्या कहें और क्या करें।

सबक है कि…
सुशांत का जाना समझाता है कि खुद में इतने मशरूफ मत होइए कि आप अपने आस पास की सिसकियों को न सुन सकें। आप महसूस ही न कर सकें कि आपका कोई अपना किस तरह अंदर से टूटकर बिखर रहा है। कोशिश किजिए बातें करने की, वक्त देने की, साथ देने की। किसी के जाने के बाद उसके नाम पर रोने से काफी बेहतर है उसके जीते जी उसे समझने की कोशिश करना ताकि बाद में कहना न पड़े कि एक बार तो कहा होता।

सुशांत सिंह राजपूत
Facebook Comments

Garry

https://www.unbiasedindia.com/author/garry/

E-mail : unbiasedgarry@gmail.com

Leave a Reply

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

Related post

error: Content is protected !!