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सच से सरोकार

जबरिया इश्क़

 जबरिया इश्क़

इश्क़ पर ज़ोर नहीं, है यह वो आतिश ग़ालिब
जो लगाए न लगे और बुझाए न बुझे।

यानी इश्क़, प्यार और मोहब्बत बस हो जाता है, इसे आप ज़ोर ज़बरदस्ती से न तो हासिल कर सकते हैं और न ही किसी भी तरह से खो सकते हैं। पर आजकल जिस तरह की ख़बरें आ रही हैं वो ये सोचने पर मजबूर कर रही हैं कि आखिर आज के युवा प्यार को किस तरह से हासिल करना चाहते हैं और इश्क़ में पड़ने के बाद क्या करना चाहते हैं।

हाल ही में एक लड़का पानी की टंकी पर चढ़ गया क्योंकि जिस लड़की से वो शादी करना चाहता था, उसकी शादी कहीं और हो रही थी। काफी मशक्कत के बाद जनाब को नीचे उतारा जा सका। एक महाशय तो लॉकडाउन के दौरान ही इज़हार—ए—इश्क के लिए पहुंच गए। तो वहीं एक लड़की से जब उसके दोस्त ने कहा कि वो उसे सिर्फ दोस्त मानता है और किसी और से प्यार करता है तो मैडम ने अपना हाथ काट लिया। फोटो व्हाट्सएप कर दी। अब श्रीमान की हालत खराब, मरता क्या न करता। लड़की कुछ कर न ले सिर्फ इस डर से उन्होंने हां कर दी।

पर सोचकर देखिए, क्या इस तरीके से हासिल किये गए इश्क़ की इबादत की जा सकती है? एक लड़की का पागलपन तो इस कदर हावी हुआ कि लड़के के घर पर पहुंचकर उसने खूब हंगामा किया कि हां बोलो, वरना तुम्हारे घर पर ही जान दे दूंगी। क्या जान इतनी सस्ती है जो किसी की हां ना पर टिकी हो? इस तरह की ख़बरों से हर दिन रुबरु होना पड़ रहा है। जब भी ये सब देखती हूं, पढ़ती हूं तो बिना लिखे रहा नहीं जाता।

आप एक इंसान से मिलते हैं, बातें करते हैं, फिर बातें करते ही जाते हैं। कहते हैं कोई भी काम 21 दिन करो तो उसकी आदत पड़ ही जाती है। अब आप दिन रात बातें करेंगे तो बात करने की आदत पड़नी तय है पर ज़रुरी नहीं कि ये आदत मोहब्बत भी हो। और फिर ये कहां का इंसाफ कि ज़िद करके, प्लानिंग—प्लॉटिंग करके प्यार को हासिल किया जाए? प्यार को पाने की कोशिश करना एक बात है और उसे पाने के लिए ब्लैकमेल करना, उसे डराना कि तुम नहीं तो कुछ भी हो सकता है, इसे कुछ भी कहा जा सकता है पर प्यार नहीं।

प्यार तो वाकई ईश्वर का एक रुप है, जहां किसी को पाकर इंसान उसे पूजने लगता है, उसे जीने लगता है। उसकी बंदगी, उसकी खुशी बन जाता है। ईश्वर को पाने के लिए भी साधना करनी पड़ती है दोस्तों, फिर प्यार को आप धमकी की नोक पर कैसे हासिल करने की सोच सकते हैं। आप क्यों नहीं सोचते कि किसी भी इंसान को किसी से भी प्यार हो सकता है, फिर ज़रुरी नहीं कि आप जिसे प्यार करें वो भी आपसे ही प्यार करे। और अगर सामने वाला आपसे प्यार नहीं करता, तो उसे धमकी देकर, डराकर हासिल करना, उसे उसके प्यार से दूर करके आपको हासिल क्या होगा? हो सकता है डर से वो इंसान आपके पास आ जाए, पर आप उसकी मोहब्बत कभी नहीं बन पाएंगे। वो हासिल होकर भी हासिल नहीं होगा, तो बेहतर यही है कि इश्क कीजिए, इज़हार भी कीजिए, इकरार हो जाए तो बल्ले—बल्ले और अगर इनकार हो तो उसके लिए भी तैयार रहिए।

वो सुना है न आपने लड़की, बस और ट्रेन के लिए कभी रोने का नहीं, एक जाती है तो दूसरी आती है। jokes apart, प्यार कीजिए पर इश्क़ को ब्लैकमेल करके हासिल करने का सोचिए भी नहीं। अब सोचिए अगर मैं ये कहूं कि अगर आपने इस पोस्ट पर अच्छे—अच्छे कमेंट नहीं किए तो मैं कुछ कर लूंगी तो आप कहेंगे, ये क्या पागलपन, ठीक इसी तरह प्यार को सीधे और सही तरीके से हासिल कीजिए, इसमें उंगली टेढ़ी करने की ज़रुरत नहीं है।
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Harshita

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1 Comments

  • well said mam, but you know my husband left me for another girl, now he wants to come back in my life, should i accept his apology, as i cant forget that he broke my heart and trust too.

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