शिक्षाविद् डॉ. अरविंद कुमार गोयल

गुमसुम सी हैं शहर की गलियां, गुम सी हैं मासूमों की मस्तियां, मुक्त हो गगन में उड़ते पंछी भी हैं हैरान कि आखिर घरों में क्यों कैद है हर इंसान। किसी को नहीं पता कि आखिर कब आएगी वो सुबह जब एक बार फिर सब बिना किसी डर के घर से बाहर निकल पाएंगे। अपनों से मिल पाएंगे। खुलकर जी पाएंगे। पर उस सुबह के इंतज़ार में बहुत सारे परिवार ऐसे भी हैं जिन्हें उस भोर से ज्यादा पेट की भूख मिटने का इंतज़ार है। ऐसे में उनके बीच पहुंची वो शख्सियत जिन्होंने अपनी ज़िंदगी का एक एक पल देश और देशवासियों के नाम कर रखा है। वो जिनकी ज़िंदगी का मकसद ही बस इतना है कि किसी की ज़िंदगी को हारने नहीं देना है, किसी मुसकान को मुरझाने नहीं देना है। जिन्होंने कभी किसी बुजुर्ग, बेसहारा, गरीब या मासूम का हाथ नहीं छोड़ा। किसी को ज़िंदगी के कठिन सवालों के आगे टूटने नहीं दिया। वो भला किसी को कोरोना से आए संकट की घड़ियों में अकेला कैसे छोड़ देते। जी हां, आप बिल्कुल ठीक समझे, हम बात कर रहे हैं मुरादाबाद के प्रसिद्ध समाजसेवी और शिक्षाविद् डॉ. अरविंद कुमार गोयल की।

डॉ. गोयल चाहते तो किसी भी ज़रिए से आर्थिक मदद ज़रुरतमंदों तक पहुंचवा देते, क्योंकि कोरोना से खुद को और अपने परिवार को बचाने के लिए घर पर रहना कितना ज़रुरी है, ये तो हम सभी जानते हैं। पर जिस इंसान ने पूरे देश को ही अपना परिवार माना हो, वो भला कब किसी बीमारी से डरने वाले हैं। बस, फिर क्या था, डॉ. अरविंद गोयल ने पास बनवाया और निकल पड़े उन अड़तीस गांवों के लोगों के पास जिन्हें उन्होंने गोद ले रखा है। डॉ. गोयल वैसे तो पूरे साल ही हर ज़रुरतमंद तक पहुंचते हैं, पर लॉक डाउन के बाद से वे हर दिन हजारों लोगों तक हर संभव मदद पहुंचा रहे हैं।
जब उनसे पूछा गया कि आपको डर नहीं लगता कि बाहर ऐसी महामारी है और आप इस तरह लोगों के बीच जा रहे हैं, तो उन्होंने अपनी उसी चिर परिचित मुसकान के साथ जवाब दिया कि नहीं, मेरे साथ लाखों लोगों की दुआएं हैं, मैं किसी बात से नहीं डरता। पर हां, अगर मेरे होते हुए एक भी इंसान भूखे पेट सोया या फिर किसी दर्द से रोया, तो ये बात सहन करनी मेरे लिए मुश्किल होगी।

लोगों के बीच सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए डॉ.गोयल न सिर्फ लोगों को कोरोना के बारे में बताते हैं बल्कि साथ ही साथ ये भी विश्वास दिलाते हैं कि कितना भी बुरा वक्त आ जाए, कितनी भी बाधाएं रास्ते में खड़ी हों, पर हर ज़रुरतमंद उन्हें हमेशा अपने साथ खड़ा पाएगा। कुछ समय पहले तक जिन चेहरों पर उदासियों के साए गहराए थे, वहां डॉ. गोयल की बातों से, उनके साथ से मुसकान और विश्वास की लालिमा फैलने लगी है।

आज के इस दौर में जहां कुछ लोग सेल्फी वाली मदद करने पहुंच रहे हैं, जिनकी मदद खाने के पैकेट बांटने के दौरान ज्यादा ध्यान सेल्फी लेने पर रहता है, वैसे लोगों के बीच डॉ. गोयल बड़ी ही ख़ामोशी से मदद में प्यार और अपनत्व का अनोखा भाव बांट रहे हैं और हमेशा की तरह लोगों के दिलों में अपना घर बना रहे हैं। तभी तो तमाम खिताबों और अवार्डों के बीच अब लोगों ने उन्हें नाम दिया है कलयुग का सारथी, जो मुश्किल की घड़ी में उनके साथ खड़ा है। डॉ. गोयल के जज्बे को हमारा सलाम।

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